रक्षा मंंत्री राजनाथ सिंह ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले?
सम्मलेन में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी इच्छा और शर्तों पर रोकने का फैसला किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय देश लंबे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार था और किसी भी परिस्थिति से निपटने की क्षमता रखता था। दिल्ली में आयोजित नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बताया और कहा कि आतंकवाद की जड़ों को पूरी तरह समाप्त करना आवश्यक है।
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इस सम्मेलन में डीआरडीओ अध्यक्ष समीर वी कामथ ने बताया कि भारत का एलआर-एएसएचएम हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम उन्नत चरण में है और इसके शुरुआती परीक्षण जल्द होने की उम्मीद है। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं के लिए है, जो मैक 10 तक की गति से उड़ सकती है। कामथ ने कहा कि भारत हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल प्रणालियों दोनों पर काम कर रहा है। ग्लाइड मिसाइल बूस्टर का उपयोग करती है, जबकि क्रूज मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन होता है। उन्होंने पारंपरिक मिसाइल बल की संरचना पर भी चर्चा की, जिसमें विभिन्न श्रेणियों की मिसाइलें होंगी। शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' परीक्षण के अंतिम चरण में है। नवंबर 2024 में, भारत ने 1,500 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया था।
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संगठन तैयार, अग्नि-VI मिसाइल पर फैसला सरकार को लेना है: डीआरडीओ
डीआरडीओ अध्यक्ष समीर वी कामथ ने राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन में अग्नि-VI बैलिस्टिक मिसाइल के विकास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सबकुछ सरकार के निर्णय पर निर्भर है। एजेंसी इसके लिए पूरी तरह तैयार है। अग्नि-VI एक उन्नत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल होगी। उन्होंने बताया कि भारत का हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम उन्नत चरण में है और शुरुआती परीक्षण जल्द होंगे। भारत हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल प्रणालियों दोनों पर काम कर रहा है। ग्लाइड मिसाइल बूस्टर का उपयोग करती है, जबकि क्रूज मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन होता है। कामथ ने पारंपरिक मिसाइल बल की संरचना पर भी बात की। इसमें छोटी, मध्यम और 2000 किलोमीटर तक की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल होंगी। शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' परीक्षण के अंतिम चरण में है और जल्द शामिल होगी। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी बहुस्तरीय पारंपरिक मिसाइल बल के विकास की बात कही।