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National Security Summit: 50 हजार करोड़ के निर्यात, छठी पीढ़ी और स्वदेशी लड़ाकू जेट; सरकार की रक्षा नीति क्या?

Thu, 30 Apr 2026 02:09 PM IST
Jyoti Bhaskar एएनआई, नई दिल्ली।

सार

National Security Summit: रक्षा मंत्रालय की योजना 50 हजार करोड़ के रक्षा उत्पादों का निर्यात करना है। बजटीय आवंटन के अलावा छठी पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं। सरकार का फोकस किन क्षेत्रों पर है? इसके संकेत नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में मिले। कार्यक्रम में शरीक रक्षा मंत्री, डीआरडीओ प्रमुख समेत शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने क्या कुछ कहा? जानिए इस खबर में
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नेशनल सिक्योरिटी समिट में रक्षा मंत्री समेत कई शीर्ष सैन्य अफसर शामिल हुए - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों के बीच भारत सरकार, देश के वैज्ञानिक और सेना के अधिकारी दुश्मनों से बचाव के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि देश को रक्षा के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अभूतपूर्व कवायद हो रही है। देश की सेना के मन में क्या है? सामरिक मोर्चे पर किस तरह के उपकरण जरूरी हैं? नीतिगत मोर्चे पर सरकार यानी रक्षा मंत्रालय और डीआरडीओ यानी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ)  जैसे संगठन किस दिशा में योजनाएं बना रहे हैं? ऐसे तमाम सवालों के जवाब राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में मिले। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, देश की सेना के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और डीआरडीओ प्रमुख सरीखे लोग शामिल हुए। कद्दावकर हस्तियों ने रक्षा जगत के तमाम सवालों के जवाब दिए।

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भारत 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात करेगा: रक्षा सचिव
इस सम्मेलन में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को विश्वास जताया कि भारत 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात लक्ष्य को आसानी से पार कर जाएगा। उन्होंने कहा कि देश इस क्षेत्र में तीव्र वृद्धि पथ पर है। पिछले साल 38,000 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जो पिछले वर्ष से 61 फीसदी अधिक है। वैश्विक संघर्षों ने पारंपरिक रक्षा उपकरणों की मांग बढ़ाई है। अब सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम निर्यात वृद्धि का नेतृत्व कर रहे हैं। एशिया और अफ्रीका के देशों में भारतीय रक्षा प्रणालियों में काफी रुचि है। सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष लाइन ऑफ क्रेडिट योजना पर काम कर रही है। भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण रक्षा साझेदारी के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। यूरोपीय देश भारत के साथ साझेदारी के इच्छुक हैं। उनके पास तकनीक है, लेकिन बढ़ती उम्र की आबादी के कारण उत्पादन और सस्ते श्रम की कमी है।

भारत की पारंपरिक मिसाइल क्षमताओं का दोबारा मूल्यांकन जरूरी: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत को अपनी पारंपरिक मिसाइल क्षमताओं का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ सकता है। यह पश्चिम एशिया के संघर्षों और पाकिस्तान की सैन्य स्थिति के कारण आवश्यक है। राष्ट्रीय राजधानी में एएनआई राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन में उन्होंने उन्नत हथियार, मजबूत वायु रक्षा प्रणालियों और त्वरित खरीद के महत्व पर जोर दिया। सिंह ने बताया कि बदलता रणनीतिक माहौल और पाकिस्तान द्वारा पारंपरिक मिसाइल बल का निर्माण भारत की रक्षा योजना में बदलाव की मांग करता है। भारत उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ संस्थागत प्रक्रियाओं में देरी नहीं करेगा और व्यापक औद्योगिक भागीदारी को बढ़ावा देगा। वैश्विक संघर्षों से मिले सबक रक्षा आधुनिकीकरण का मार्गदर्शन कर रहे हैं, वायु रक्षा और ड्रोन प्राथमिकताएं हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले साल 'सुदर्शन चक्र मिशन' की घोषणा की थी, जिस पर काम चल रहा है। पिछले दो वर्षों में लगभग 4.5 लाख करोड़ रुपये के रक्षा अनुबंध किए गए हैं, महत्वपूर्ण क्षमता अंतराल भरे जा रहे हैं।

स्वदेशी लड़ाकू जेट उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम, छठी पीढ़ी के लिए भी साझेदारों की तलाश

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रक्षा सचिव ने बताया कि भारत के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) की खरीद प्रक्रिया प्रगति पर है। निजी क्षेत्र को जल्द ही आरएफपी जारी होने की संभावना है। यह स्वदेशी लड़ाकू जेट उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम है। भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए साझेदारी भी तलाश रहा है। उत्पादन क्षमताओं में विविधता लाना रणनीतिक रूप से फायदेमंद है। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान, रिफ्यूलर और अवाक्स के अंतराल भरने के प्रयास जारी हैं। इनके अनुबंध अगले एक साल में होने की उम्मीद है। डीआरडीओ अध्यक्ष समीर वी कामथ ने घातक यूसीएवी को स्टील्थ लड़ाकू विमान जैसा बताया। रक्षा खरीद बोर्ड ने लगभग 67 ऐसे सिस्टम शामिल करने का प्रस्ताव मंजूर किया।

रक्षा मंंत्री राजनाथ सिंह ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले?
सम्मलेन में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी इच्छा और शर्तों पर रोकने का फैसला किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय देश लंबे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार था और किसी भी परिस्थिति से निपटने की क्षमता रखता था। दिल्ली में आयोजित नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बताया और कहा कि आतंकवाद की जड़ों को पूरी तरह समाप्त करना आवश्यक है।

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हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण, अब आगे क्या?

इस सम्मेलन में डीआरडीओ अध्यक्ष समीर वी कामथ ने बताया कि भारत का एलआर-एएसएचएम हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम उन्नत चरण में है और इसके शुरुआती परीक्षण जल्द होने की उम्मीद है। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं के लिए है, जो मैक 10 तक की गति से उड़ सकती है। कामथ ने कहा कि भारत हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल प्रणालियों दोनों पर काम कर रहा है। ग्लाइड मिसाइल बूस्टर का उपयोग करती है, जबकि क्रूज मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन होता है। उन्होंने पारंपरिक मिसाइल बल की संरचना पर भी चर्चा की, जिसमें विभिन्न श्रेणियों की मिसाइलें होंगी। शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' परीक्षण के अंतिम चरण में है। नवंबर 2024 में, भारत ने 1,500 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया था।

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संगठन तैयार, अग्नि-VI मिसाइल पर फैसला सरकार को लेना है: डीआरडीओ

डीआरडीओ अध्यक्ष समीर वी कामथ ने राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन में अग्नि-VI बैलिस्टिक मिसाइल के विकास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सबकुछ सरकार के निर्णय पर निर्भर है। एजेंसी इसके लिए पूरी तरह तैयार है। अग्नि-VI एक उन्नत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल होगी। उन्होंने बताया कि भारत का हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम उन्नत चरण में है और शुरुआती परीक्षण जल्द होंगे। भारत हाइपरसोनिक ग्लाइड और क्रूज मिसाइल प्रणालियों दोनों पर काम कर रहा है। ग्लाइड मिसाइल बूस्टर का उपयोग करती है, जबकि क्रूज मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन होता है। कामथ ने पारंपरिक मिसाइल बल की संरचना पर भी बात की। इसमें छोटी, मध्यम और 2000 किलोमीटर तक की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल होंगी। शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय' परीक्षण के अंतिम चरण में है और जल्द शामिल होगी। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी बहुस्तरीय पारंपरिक मिसाइल बल के विकास की बात कही।
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