फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

असम : उदलगुड़ी जिले में पुलिस ने बोडो जिला कमांडर को किया ढेर, पिस्टल और कारतूस बरामद

Tue, 13 Jul 2021 10:29 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने सुबह माजबात पुलिस थाना क्षेत्र के दिमाचांग में तलाशी अभियान शुरू किया, जिसमें एनएलएफबी का स्वयंभू उदलगुड़ी जिला कमांडर जयपुरुष मारा गया।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

असम के उदलगुड़ी जिले में मंगलवार को पुलिस ने मुठभेड़ में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनएलएफबी) के एक जिला कमांडर को मार गिराया। विशेष पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। सिंह के मुताबिक, एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने सुबह माजबात पुलिस थाना क्षेत्र के दिमाचांग में तलाशी अभियान शुरू किया, जिसमें एनएलएफबी का स्वयंभू उदलगुड़ी जिला कमांडर जयपुरुष मारा गया।

विज्ञापन


उसके कब्जे से एक पिस्टल और बहुत सारे कारतूस बरामद किए गए। सिंह के मुताबिक, मारा गया उग्रवादी एनडीएफबी के पूर्व नेता एम. बाथा का करीबी था। बाथा ने तीसरे बोडो शांति समझौते के तहत पिछले साल जनवरी में बहुत सारे साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था।

लेकिन बाद में बाथा ने दोबारा घने जंगलों में ठिकाना बनाकर एनएलएफबी के गठन की घोषणा कर दी थी। इस उग्रवादी संगठन पर बोडोलैंड स्वायत्त क्षेत्र के तहत आने वाले जिलों में रंगदारी वसूलने और हत्याएं करने के बहुत सारे आरोप हैं।
विज्ञापन


मानवाधिकार आयोग ने दिए जांच के आदेश
असम पुलिस की तरफ से किए गए एनकाउंटरों पर छिड़ी राजनीतिक रार के बीच राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। पिछले दो महीनों में हुई इन मुठभेड़ में 12 लोगों की मौत हुई है, जिन्हें लेकर विपक्षी दल कांग्रेस और अगपा ने राज्य की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। 

असम मानवाधिकार आयोग (एएचआरसी) ने इन मुठभेड़ से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की है। आयोग के सदस्य नाबा कमल बोरा ने अपने आदेश में कहा है कि मीडिया रिपोर्टों में पुलिस फायरिंग के समय सभी आरोपियों के पास कोई हथियार नहीं होने और उनके हाथ बंधे होने का दावा किया गया है। 

उन्होंने राज्य के गृह सचिव को ‘स्थिति की गंभीरता’ को ध्यान में रखते हुए इस मामले में जांच शुरू करने का आदेश दिया है, जिसमें मुठभेड़ के दौरान की परिस्थितियों और तथ्यों को बारीकी से परखे जाने का निर्देश दिया गया है। 

साथ ही ताकीद की है कि पुलिस हिरासत में या उसका पीछा करने के दौरान आरोपी पर फायरिंग करना एक ट्रेंड नहीं बनना चाहिए। गृह सचिव को 17 अगस्त तक रिपोर्ट आयोग के पास दाखिल करने का आदेश दिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें