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देश में धड़ाधड़ चल रही 'मां की कोख' पर कैंची, बढ़ गए सर्जरी से पैदा होने वाले बच्चे

Sat, 30 Jan 2021 06:18 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अब तक के जारी हुए आंकड़ों में तेलंगाना ऐसा राज्य है, जहां हर दूसरा बच्चा सर्जरी से पैदा हो रहा है। यही नहीं जो गर्भवती महिला प्राइवेट अस्पतालों में डिलीवरी के लिए जाती हैं, तो वहां 81 फीसदी महिलाओं की सर्जरी से ही डिलीवरी होती है...
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सीजिरियन ऑपेरेशन - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार
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देश में मां की कोख पर धड़ाधड़ कैंचियां चल रही हैं। उसके बाद ही घर के आंगन में किलकारियों की गूंज सुनाई देती है। दरअसल देश में हर साल सर्जरी से पैदा होने वाले बच्चों की तादात बढ़ रही है। यह संख्या सिर्फ निजी अस्पतालों में ही नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों में भी बढ़ी है। देश के कुछ राज्य तो ऐसे हैं कि जहां सिजेरियन डिलीवरी की संख्या सामान्य डिलीवरी की तुलना में ज्यादा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की हाल में जारी हुई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

तेलंगाना में तो हर दूसरा बच्चा सर्जरी से पैदा हो रहा

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अब तक के जारी हुए आंकड़ों में तेलंगाना ऐसा राज्य है, जहां हर दूसरा बच्चा सर्जरी से पैदा हो रहा है। यही नहीं जो गर्भवती महिला प्राइवेट अस्पतालों में डिलीवरी के लिए जाती हैं, तो वहां 81 फीसदी महिलाओं की सर्जरी से ही डिलीवरी होती है। जबकि पांच साल पहले इस राज्य में 74 फीसदी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी होती थी। यहां सरकारी अस्पतालों में भी 40 फीसदी महिलाओं की डिलीवरी सर्जरी से ही हो रही है।

बंगाल में निजी अस्पतालों में खूब हो रही सर्जरी

पश्चिम बंगाल में पैदा होने वाले एक तिहाई बच्चे सर्जरी से ही होते हैं। उसमें भी जो प्राइवेट अस्पताल में गया तो समझो सर्जरी से ही डिलीवरी तय हैं। आंकड़ें बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में जो एक तिहाई बच्चे सर्जरी से पैदा होते हैं, उनमें से प्राइवेट अस्पताओं में ही तकरीबन 83 फीसदी बच्चों का जन्म होता है। पांच साल पहले यह आंकड़ा 71 फीसदी था। जबकि जम्मू और कश्मीर में भी हो रही है खूब सर्जरी जम्मू-कश्मीर में होने वाले बच्चों में 42 फीसदी बच्चे सर्जरी से हो रहे हैं। जिसमें 82 फीसदी बच्चे प्राइवेट अस्पतालों में होते हैं। गोवा में भी तकरीबन 40 फीसदी बच्चे सिजेरियन होते हैं। जिसमें आधे बच्चे प्राइवेट अस्पतालों में होते हैं।

पांच साल में ऐसे बढ़े सिजेरियन मामले

  • गोवा में पांच साल पहले 31 फीसदी सिजेरियन होते थे। अब यह आंकड़ा 40 फीसदी है।
  • बिहार में पांच साल पहले छह फीसदी बच्चे सर्जरी से होते थे, अब यह आंकड़ा सात फीसदी है।
  • असम में पांच साल पहले यही आंकड़ा 13 फीसदी था। जो अब बढ़कर 18 फीसदी हो गया है।
  • आंध्र प्रदेश में पांच साल पहले 40 फीसदी सर्जरी से डिलीवरी होती थीं, अब यह बढ़कर 42 फीसदी पर पहुंच गया है।
  • अंडमान में पहले 19 फ़ीसदी ही सिजेरियन डिलीवरी होती थीं, अब 30 फीसदी सर्जरी से डिलीवरी हो रही हैं।
  • दमन में भी सिजेरियन का आंकड़ा 16 फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी हो गया।
  • केरल में पांच साल पहले 23 फीसदी सर्जरी होती थी, अब यहां 31 फीसदी से ज्यादा सर्जरी से बच्चे हो रहे हैं।
  • पश्चिम बंगाल में पांच साल पहले 24 फीसदी सिजेरियन होते थे, अब यह संख्या बढ़कर 32 फीसदी से ज्यादा हो गयी है।
  • तेलंगाना में तो 61 फीसदी बच्चे सर्जरी से हो रहे हैं। पांच साल पहले यह आंकड़ा 57 फीसदी था।
  • महाराष्ट्र में पांच साल पहले 20 फीसदी आंकड़ा था। अब 25 फीसदी से ज्यादा हो गया।

नागालैंड, मणिपुर और लद्दाख में कम हुई सिजेरियन डिलीवरी

नागालैंड में पांच साल पहले 5.8 फीसदी बच्चे सर्जरी से होते थे। जो अब घटकर 5.2 फीसदी तक पहुंच गए हैं। इसी तरह लद्दाख में पहले 39 फीसदी सिजेरियन डिलीवरी होती थी, जो अब कम होकर 31 फीसदी हो गयी हैं। मणिपुर में पांच साल पहले तकरीबन 13 फीसदी सर्जरी होती थीं। अब यह आंकड़ा 11 फीसदी के करीब पहुंच गया है।

पेनलेस डिलीवरी की मांग

इंडियन गाइनेकोलॉजिकल सोसाइटी की सदस्य डॉक्टर पुष्पा जायसवाल कहती हैं कि कई बार केस बिगड़ने पर सर्जरी करके ही डिलीवरी करानी पड़ती है। वो चाहे सरकारी अस्पताल हो या प्राइवेट। कई बार लोगों की डिमांड भी होती है कि पेनलेस डिलीवरी हो। ऐसे में सिजेरियन ही उपाय है। इसके अलावा आजकल हेल्थ इंश्योरेंस भी अधिकांश लोग करा रहे हैं, तो उसका भी उनको फायदा मिल रहा है।

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