एनजीटी ने कहा कि सुनवाई के लिए आने वाले वकील या पक्षकार एनजीटी भवन में आने के लिए प्रवेश भवन पर ही थर्मल स्कैनिंग और तापमान चेक कराएंगे। साथ ही यह भी कहा गया है कि वकील या पक्षकार जो 65 साल से ऊपर के हो और बुखार या किसी बीमारी से पीड़ित हों, वे लोग एनजीटी ऑफिस में आने से परहेज करें।
नेशनल ग्रीन ट्रिव्यूनल (एनजीटी) ने 21 मार्च से प्रधान पीठ के सामने शारीरिक सुनवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान कुछ विकल्पों का पालन करना होगा। इसके लिए एनजीटी ने गुरुवार को एक विज्ञप्ति भी जारी की। इसमें संचालन मानको को शामिल किया गया है।
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कोरोना महामारी के मद्देनजर एनजीटी ने प्रधान पीठ के कामकाज के संदर्भ में पहले से जारी निर्देशों में कुछ संसोधन किए हैं। एनजीटी ने कहा कि सभी मामलों में वकील या पक्षकार या तो फिजिकल मोड में या फिर वीडियो कांफ्रेंसिग के द्वारा सुनवाई कर सकते हैं। भौतिक रूप से सुनवाई करने के लिए आने वाले वकीलों के लिए एक अलग रजिस्टर बनाया जाएगा, जिसमें कार्यालय के मेन गेट पर ही वहां मौजूद कर्मचारी, वकील से संबंधित सारी जानकारी लिखेंगे। एनजीटी ने यह भी कहा कि वकीलों को वहां मौजूद कर्मचारी को पूरा सहयोग करना होगा।
एनजीटी ने कहा कि सुनवाई के लिए आने वाले वकील या पक्षकार एनजीटी भवन में आने के लिए प्रवेश भवन पर ही थर्मल स्कैनिंग और तापमान चेक कराएंगे। साथ ही यह भी कहा गया है कि वकील या पक्षकार जो 65 साल से ऊपर के हो और बुखार या किसी बीमारी से पीड़ित हों, वे लोग एनजीटी ऑफिस में आने से परहेज करें। साथ ही बुखार, खांसी या फ्लू के लक्षणों वाले किसी भी व्यक्ति को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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एनजीटी ने कहा है कि कोरोना के संदर्भ में जारी गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन किया जाएगा। परिसर में हमेशा मास्क लगाए रखना और शारीरिक दूरी का पालन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। कोरोना के लिए भारत सरकार, एनजीटी दिल्ली और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है।