राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह इस बार नई दिल्ली के बजाय गुजरात के केवड़िया में होने जा रहा है। 22 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुरस्कार प्रदान करेंगी। समारोह के स्थान को लेकर महाराष्ट्र के विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। आइए जानते हैं कि इस मामले पर किसने क्या कहा...
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को दिल्ली से गुजरात ले जाने को लेकर महाराष्ट्र में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि समारोह को गुजरात ले जाने का फैसला राष्ट्रीय राजधानी और मुंबई के महत्व को कम करने की कोशिश का हिस्सा है।
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राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह 22 सितंबर को गुजरात के केवड़िया में आयोजित होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुरस्कार प्रदान करेंगी। केवड़िया का नाम बदलकर एकता नगर किया गया है। यहां दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा स्थित है। 597 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में किया था।
शिवसेना यूबीटी ने लगाए क्या आरोप?
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी कहा कि भाजपा नीत केंद्र सरकार हर चीज गुजरात ले जाना चाहती है, चाहे वह ओलंपिक खेल हों या क्रिकेट मैच। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार गुजरात के लिए है या पूरे देश के लिए।
आदित्य ने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तेल रिफाइनरी परियोजना और डेटा सेंटर जैसे प्रोजेक्ट गुजरात ले जाए जाने चाहिए और अच्छे प्रोजेक्ट या पहल महाराष्ट्र में लाई जानी चाहिए। आदित्य ने कहा, "गुजरात ले जाने के लिए अब केवल राष्ट्रपति भवन ही बचा है।"
क्या दिल्ली-मुंबई के महत्व को कम करने की हो रही कोशिश?
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह देश की राजधानी होने के कारण नई दिल्ली में ही आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि क्रिकेट विश्व कप के मुकाबलों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के दौरों समेत कई अहम कार्यक्रम गुजरात में आयोजित किए जा रहे हैं। सुले ने कहा कि इससे दिल्ली और मुंबई के महत्व को कम करने की कोशिश हो सकती है।
बारामती की सांसद ने कहा, "देश के 72 साल के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय पुरस्कार गुजरात में आयोजित किए जा रहे हैं। हमारा मानना है कि राष्ट्रीय पुरस्कार हमेशा दिल्ली में दिए जाने चाहिए। जो चीजें राष्ट्रीय स्तर की हैं, वे राष्ट्रीय स्तर पर ही रहनी चाहिए।"
उन्होंने कहा, "जब बड़े कार्यक्रम दिल्ली में आयोजित किए जाते हैं, तो उन्हें दिल्ली में ही होना चाहिए। इसी वजह से उन्हें राष्ट्रीय कार्यक्रम कहा जाता है, क्योंकि दिल्ली देश की राष्ट्रीय राजधानी है। अगर कोई राष्ट्रीय कार्यक्रम है, तो उसे राष्ट्रीय राजधानी में ही होना चाहिए। इसे कहीं और कैसे आयोजित किया जा सकता है?"
सुले ने क्रिकेट विश्व कप के मुकाबलों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के गुजरात में बढ़ते दौरों का जिक्र करते हुए कहा कि यह दिल्ली और मुंबई के महत्व को कम करने की कोशिश हो सकती है।
राज ठाकरे ने क्यों साधा पीएम मोदी पर निशाना?
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि देश में इससे पहले भी कई प्रधानमंत्री रहे हैं, लेकिन किसी ने अपने गृह राज्य या अपने कार्यक्षेत्र वाले राज्य को उसकी वास्तविक स्थिति से ज्यादा बड़ा दिखाने की कोशिश नहीं की। मनसे प्रमुख ने कहा, "यहां हम देख रहे हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों को गुजरात ले जाने की कोशिश हो रही है, 2023 क्रिकेट विश्व कप का फाइनल गुजरात में आयोजित किया गया, विदेशी राष्ट्रपतियों को गुजरात ले जाया गया और गिफ्ट सिटी को मुंबई से गुजरात ले जाया गया।"
उन्होंने दावा किया कि मौजूदा शासक कला और संस्कृति के प्रति विशेष रूप से रुचि नहीं रखते। उनके मुताबिक उनका एकमात्र वास्तविक "कला" किसी भी कीमत पर चुनाव जीतना और अपनी इच्छा दूसरों पर थोपना है। राज ठाकरे ने कहा कि सिनेमा से उनका जुड़ाव भी प्रचार आधारित फिल्में बनवाने और फिर ऐसी फिल्मों को पुरस्कार दिलाने तक सीमित नजर आता है।
मनसे ने दक्कन क्षेत्र की पहचान और गौरव से क्यों जोड़ा ये मुद्दा?
उन्होंने कहा, "दक्षिण के दूसरे सिनेमा प्रेमी राज्य इसका कड़ा विरोध कर सकते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा कुछ खास होने की संभावना नहीं है। हालांकि, कलाकारों को इसके खिलाफ अपनी आवाज उठानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि मुद्दा केवड़िया या किसी खास शहर का नहीं है। सवाल यह है कि देश की राजधानी में राष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाने की पुरानी परंपरा क्यों तोड़ी जा रही है। मनसे प्रमुख ने कहा कि कलाकारों को इस मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आगे चलकर ये लोग यह भी आदेश दे सकते हैं कि अगर गुजरात में आयोजन के लिए जगह नहीं है तो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ही नहीं होंगे। मनसे अध्यक्ष ने कहा, "ऑस्कर समारोह लॉस एंजिलिस में आयोजित होता है। ट्रंप, बुश या ओबामा जैसे अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने कभी समारोह को अपने-अपने गृह राज्यों में ले जाने की कोशिश नहीं की।"
राज ठाकरे ने कहा, "अगर महाराष्ट्र और दक्षिणी राज्य मजबूत रुख नहीं अपनाते हैं, तो यही लोग आगे चलकर पूरे दक्कन क्षेत्र की पहचान और गौरव को भी खत्म कर देंगे। तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।"