साल 2019-21 के दौरान हुए इस सर्वे ने कामकाजी-शादीशुदा पुरुषों का आंकड़ा 98 प्रतिशत बताया गया है। 2016 के सर्वे में 31 फीसदी विवाहित महिलाओं को कामकाजी बताया था, यानी चार साल में बहुत फर्क नहीं आया।
भारत में 15 से 49 साल की विवाहित महिलाओं में से केवल 32 फीसदी ही काम पर जा रही हैं। हालांकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) - 5 में इनकी संख्या चार साल पहले के मुकाबले एक प्रतिशत बढ़ी है लेकिन पति से ज्यादा या बराबर कमाने वाली महिलाओं की संख्या 42 से घटकर 40 फीसदी रह गई है।
तथ्य जहां महिलाओं को समान काम के बदले वेतन में फर्क दर्शा रहे हैं, वहीं रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत भी बताते हैं।
साल 2019-21 के दौरान हुए इस सर्वे ने कामकाजी-शादीशुदा पुरुषों का आंकड़ा 98 प्रतिशत बताया।
2016 के सर्वे में 31 फीसदी विवाहित महिलाओं को कामकाजी बताया था, यानी चार साल में बहुत फर्क नहीं आया।
विज्ञापन
यह भी आया सामने
उम्र कम तो काम के बदले रुपये में भुगतान भी कम।
22 फीसदी लड़कियों को (15-19 वर्ष) काम के बदले कैश नहीं मिलता। हालांकि 25 से अधिक उम्र में संख्या 17% है।
85 फीसदी महिलाएं खुद यह तय करती हैं कमाई कहां खर्च करेंगी।
42 फीसदी वर्ष 2016 के बाद से पति से ज्यादा कमाने वाली कामकाजी महिलाएं घटीं।
साल 2015-16 के मुकाबले कामकाजी-शादीशुदा महिलाओं की संख्या कई राज्यों कम भी हुई है।