पर्यावरण मंत्रालय ने शुक्रवार को घोषणा की कि प्रजातियों के संरक्षण अभियान के तहत और जागरूकता पैदा करने के लिए इस साल से पांच अक्तूबर को ‘राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्विटर पर इसकी घोषणा की।
यादव ने कहा, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने अपनी 67वीं बैठक में निर्णय लिया है कि इस वर्ष से पांच अक्तूबर को ‘राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। जागरूकता उत्पन्न करना और सामुदायिक भागीदारी इस प्रजाति के संरक्षण के लिए अभिन्न अंग है।
भारत में ज्यादातर गांगेय डॉल्फिन, डॉल्फिन की मीठे पानी की एक प्रजाति है और यह असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में लंबी गहरी नदी में देखी जाती है।
गंगा नदी की डॉल्फिन को 2010 में राष्ट्रीय जलीय प्रजाति घोषित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2020 में मीठे पानी और समुद्री डॉल्फिन दोनों के संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन’ की घोषणा की थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में गांगेय डॉल्फिन की संख्या 3,700 है।
वन्य जीव बोर्ड की स्थाई समिति की बैठक में कई परियोजनाओं की सिफारिश
वन्य जीव बोर्ड की स्थाई समिति की बैठक में 40 प्रस्तावों पर विचार किया गया, और सार्वजनिक महत्व की कई परियोजनाओं की सिफारिश की गई। इसके अलावा स्थानीय समुदाय की आजीविका के लिहाज से अनिवार्य कई परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
इसमें लद्दाख, हिमाचल से लेकर कर्नाटक में बिजली, पीने के पानी से लेकर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में सड़क और सीमा चौकी जैसी रणनीतिक महत्व की योजनाओं की सिफारिश शामिल है। इसके अलावा हरियाणा में अभ्यारण के भूजल को चार्ज करने के लिए मिट्टी के बांधों की भी सिफारिश की गई है। उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कें बनाने पर सहमति बनी है, इससे वन्य जीव उपयुक्त सरंचनाओं के साथ दूरदराज के गांव भी आपस में जुड़ेंगे।