ऑल इंडिया रेलवेमैंस फेडरेशन के महासचिव और केंद्रीय कर्मियों की राष्ट्रीय परिषद के सचिव शिव गोपाल मिश्र का कहना है कि यूपीएस को सभी राज्यों को लागू करना पड़ेगा। यह मुद्दा देशभर के कर्मचारियों का है। जिन राज्यों ने पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा की थी, उन्हें भी यूपीएस लागू करनी होगी। मिश्र ने अमर उजाला से बातचीत में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए...
सवाल- एकीकृत पेंशन योजना पुरानी पेंशन से किस तरह अलग है?
जवाब- पुरानी पेंशन में कर्मचारियों को किसी तरह का अंशदान नहीं करना पड़ता था। एकीकृत पेंशन योजना में नई पेंशन की तरह 10 प्रतिशत अंशदान जारी रहेगा। लेकिन, सरकार इस राशि के बदले तय फॉर्मूले पर एक एकमुश्त राशि का अलग से भी भुगतान करेगी। सरकार ने सुनिश्चित पेंशन के लिए अपना अंशदान भी 14 फीसदी से बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत कर दिया है।
सवाल- क्या कर्मचारी अंशदान पूरा वापस नहीं होना चाहिए?
जवाब- हमारी मांग थी कि सरकार कर्मचारी अंशदान का पूरा पैसा वापस करे। लेकिन, सरकार तय फॉर्मूले पर एकमुश्त देने पर सहमत हुई।
सवाल- पूर्ण पेंशन के लिए 25 साल की शर्त का क्या मतलब?
जवाब- पहले 35 साल की सेवा पर पूर्ण पेंशन मिलती थी। हमारे प्रयास से अब 25 वर्ष की सेवा पर ही पूर्ण पेंशन मिलेगी। यह बहुत बड़ा कदम है।
सवाल- न्यूनतम पेंशन का क्या फॉर्मूला है?
जवाब- 10 वर्ष की सेवा पर कर्मचारी न्यूनतम पेंशन के हकदार हो जाएंगे। यह 10 हजार रुपये न्यूनतम है। वास्तव में उसे 10 हजार रुपये के साथ महंगाई राहत मिलेगी। आज जो कर्मचारी रिटायर होंगे, उन्हें कम से कम 15 हजार मिलेगा। इसी तरह वर्ष के हिसाब से कितनी राशि मिलेगी, यह फॉर्मूले से निकाला जा सकता है।
सवाल- क्या कर्मचारियों के पेंशन से जुड़े सभी मसले इस स्कीम से हल हो गए?
जवाब- निश्चित रूप से। नई पेंशन में कर्मचारी 2,000, 3,000, 4,000 रुपये पेंशन के साथ रिटायर हो रहे थे। एकीकृत पेंशन न सिर्फ न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित कर रही है, बल्कि पहले से कम समय में पूर्ण पेंशन का रास्ता खोल रही है। खास बात यह है कि योजना नई पेंशन लागू होने के समय से लागू हो रही है। सेवानिवृत्त पेंशनर भी इसके लाभ के दायरे में हैं। ऐसा संवेदनशील प्रधानमंत्री के कारण संभव हुआ है। प्रधानमंत्री ने कर्मचारियों को बुलाकर सुना और मांगों पर कार्यवाही की।
पुरानी और नई पेंशन योजना पर यह था विवाद
- पुरानी पेंशन योजना में सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय मिल रहे वेतन की आधी रकम पेंशन के रूप में मिलती है। इसके लिए उन्हें कोई योगदान नहीं देना पड़ता है। पूरा भुगतान सरकार अपने खजाने से करती है। उन्हें 20 लाख रुपये तक ग्रैच्युटी मिलती है। इसमें जनरल प्रोविडेंट फंड का प्रावधान है। हर छह माह बाद महंगाई भत्ता बढ़ाने का प्रावधान है।
- नई पेंशन योजना में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए का 10 फीसदी हिस्सा कटता है। यह पेंशन योजना शेयर पर आधारित है, इसलिए कर्मचारी इसे अधिक सुरक्षित नहीं मानते। इसे महंगाई भत्ते से भी नहीं जोड़ा है। सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं है। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन पाने के लिए एनपीएस का 40% हिस्सा एन्युटी में निवेश करना होगा। यही नहीं, एनपीएस टैक्स के दायरे में भी आता है। इसे लेकर कर्मचारी एनपीएस का विरोध करते रहे हैं।