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कभी देशभर में लागू था सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजने का आदेश, जानिए कैसे हुआ बंद

Wed, 30 Nov 2016 04:39 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा कि देशभर के सिनेमा हॉलों में अब फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजना और उसके सम्मान में लोगों का खड़ा होना जरूरी होगा। 
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कोर्ट का यह आदेश सुनने में बेशक पहली बार में थोड़ा अजीब लग रहा हो लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि देश में आजादी के बाद शुरूआती दौर में यह व्यवस्‍था पहले से लागू रही है, यहां तक की महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में तो आज भी इसका पालन किया जा रहा है। 

लेकिन ऐसा क्या हुआ कि सुप्रीम कोर्ट को एक बार फिर स्थिति स्पष्ट करते हुए दोबारा इसमें आदेश जारी करना पड़ा। चलिए आइए डालते हैं इसके इतिहास पर एक नजर-
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चीन से युद्ध के बाद सिनेमाघरों में बजना शुरू हुआ था राष्ट्रगान

चीन से युद्ध के बाद जब देश हताशा और निराशा के दौर से जूझ रहा था तब देश के सिनेमाघरों और थिएटरों ने फिल्म खत्म होने के बाद अपने अपने यहां राष्ट्रगान बजाना शुरू किया गया। हालांकि कहा ये भी जाता है कि सरकार की ओर से यह आदेश जारी किया गया था लेकिन इसके पुष्ट प्रमाण नहीं मिलते हैं।

बहरहाल सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजना शुरू हो गया था। जिसे लोगों ने हाथों हाथ लिया और देशभक्ति की बयार सी चल पड़ी। लेकिन जैसे की हमेशा से होता आया है कुछ दिन बाद ही यह व्यवस्‍था लोगों को बोझिल लगने लगी, नतीजा ये हुआ कि फिल्म खत्म होते ही एक ओर लोग घर पहुंचने की जल्दी में रहते और दूसरी ओर सिनेमाहॉल में राष्ट्रगान बजता रहता। 

शिकायतें ये भी हुई कि राष्ट्रगान बजने के दौरान काफी लोग खड़े नहीं होते हैं इससे राष्ट्रगान का अपमान होता है। वहीं कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी इसका विरोध किया। इसके बाद हरियाणा सहित कई राज्यों में तो सरकार ने आदेश कर सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाए जाने पर रोक लगा दी। 

महाराष्ट्र में इस संबंध में 2002 में बनाया गया कानून

हालांकि कुछ राज्यों में इसके समर्थन में रह रहकर आवाज उठती रही। महाराष्ट्र में साल 2002 में कुछ लोगों ने फिर इस मुहिम को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया और सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत की। 

मामला जनभावना और देशप्रेम से जुड़ा था नतीजतन प्रदेश सरकार ने इसे हाथों हाथ लिया और विधानसभा में आदेश पारित कर कानून बना दिया कि हर सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाएगा। तमिलनाडु में सिनेमाघरों ने इस प्रथा को दोबारा शुरू करने की कोशिश की लेकिन कुछ लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और वो इसके खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। 

लेकिन यहां उन्हें कोर्ट से तब झटका लगा जब कोर्ट ने राष्ट्रगान को बंद करने से इंकार करते हुए अन्य सिनेमाघरों को भी फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान शुरू करने के निर्देश दिए। 
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एमपी निवासी श्याम नारायण ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका

इस मुहिम के बाद ही देशभर में भी इस व्यवस्‍था को लागू करने की मुहिम शुरू हुई। मध्यप्रदेश निवासी श्याम नारायण चौकसे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाना चाहिए ताकि हर देशवासी के दिल में देशप्रेम का जज्बा कायम रहे। 

इसके अलावा उन्होंने चौकसे ने यह भी मांग की थी कि राष्ट्रगान को सरकारी समारोह और कार्यक्रमों में बजाने के लिए उचित नियम और प्रोटोकॉल तय किया जाए जिससे इसका अपमान न हो। शिकायत थी कि कई बार राष्ट्रगान का संक्षित रूप ही बजा दिया जाता है जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। 

चौकसे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण निर्णय पारित कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रगान का व्यवसायिक इस्तेमाल न किया जाए न ही आपत्तिजनक चीजों पर इसे प्रिंट किया जाए।
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