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हड़ताल : आज से दो दिन के लिए बैंक बंद, इन सेवाओं पर नहीं पड़ेगा कोई असर

Mon, 15 Mar 2021 11:52 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दो सरकारी बैंकों के निजीकरण के फैसले के बाद बैंककर्मियों की हड़ताल
  • सोमवार और मंगलवार को बंद रहेंगे सरकारी बैंक
  • एटीएम की सुविधा पर नहीं पड़ेगा कोई असर
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बैंकों की दो दिन की हड़ताल - फोटो : ANI
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विस्तार
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दो बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ सोमवार और मंगलवार को देशभर में बैंककर्मी हड़ताल पर हैं। दो दिन बैंक बंद रहने से बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहेगा। हड़ताल के चलते बैंक शाखाओं में पैसा निकालने और जमा करने, चेक क्लीयरेंस और ऋण मंजूरी जैसी सेवाओं पर असर पड़ेगा। 

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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) बैनर के तले नौ यूनियन ने हड़ताल का आह्वान किया है। ऑल इंडिया बैंक इम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने 10 लाख बैंककर्मियों के हड़ताल में शामिल होने का दावा किया है। इसी बीच पश्चिम बंगाल से भी हड़तालें की तस्वीरें सामने आ रही हैं। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में बैंकों ने सोमवार और मंगलवार को बंद करने का आह्वान किया है। 


दिल्ली के कनॉट प्लेस में बैंककर्मचारियों की हड़ताल
पश्चिम बंगाल के अलावा दिल्ली से भी हड़ताल की कई तस्वीरें सामने आईं। दिल्ली के कनॉट प्लेस में बैंककर्मचारियों ने दो दिन की हड़ताल के समर्थन में नारेबाजी की। इस हड़ताल में महिला कर्मचारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 

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त्रिपुरा में हड़ताल करते बैंककर्मी 
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में भी बैंक कर्मचारियों ने भी हड़ताल में हिस्सा लिया। लोगों ने अपने हाथों में दो सरकारी बैंकों के निजीकरण के खिलाफ पोस्टर लिए हड़ताल में हिस्सा लिया और नारेबाजी भी की।
 

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एटीएम सेवाएं रहेंगी जारी

बैंकों की दो दिन की हड़ताल के बाद भी एटीएम सेवाएं चालू रहेंगी। हालांकि हड़ताल के दौरान ग्राहकों के पास ऑनलाइन ट्रांजैक्शन जैसे दूसरे विकल्प मौजूद रहेंगे। इसके अलावा ग्राहक यूपीआई भुगतान सेवाओं और घर बैठे नेट बैंकिंग सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्यों हो रही है हड़ताल?
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में एलान किया था कि सरकार ने इस साल दो सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी के निजीकरण का फैसला किया है। सरकार इससे पहले आईडीबीआई बैंक में अपनी ज्यादातर हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम को बेच चुकी है। पिछले चार साल में सार्वजनिक क्षेत्र के 14 बैंकों का विलय किया जा चुका है।

सरकारी लेन-देन पर पड़ा असर
आल इंडिया बैंक एम्पलायीज एसोसियेसन (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम के मुताबिक बैंकों के शाखा स्तर पर चेक क्लीयरेंस और सरकारी लेनदेन पर असर पड़ा है। इसके साथ ही उनहोंने कहा कि मुद्रा बाजार और शेयर बाजार पर भी इसका असर दिख सकता है।

कौन-से यूनियन हैं शामिल ?
यूएफबीयू के बैनर तले आने वाली बैंक यूनियनों में आल इंडिया बैंक एम्पलायीज एसोसियेसन (एआईबीईए), आल इंडिया बेंक आफीसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी), नेशनल कन्फेडरेशन आफ बैंक एम्पलायीज (एनसीबीई), आल इंडिया बैंक आफीसर्स एसोसियेसन (एआईबीओए) और बैंक एम्पलायीज कन्फेडरेशन आफ इंडिया (बीईएफआई) के साथ ही इंडियन नेशनल बैंक एम्पलायीज फेडरेशन (आईएनबीईएफ), इंडियन नेशनल बैंक आफीसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी), नेशनल आगर्नाइजेशन आफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) और नेशनल आगर्नाइजेशन आफ बैंक आफीसर्स (एनओबीओ) शामिल हैं।
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