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CDS: 'केवल सेना नहीं, कूटनीति-अर्थव्यवस्था-तकनीक पर भी निर्भर करती है राष्ट्र की सुरक्षा', जनरल चौहान बोले

Sat, 15 Nov 2025 07:33 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

CDS: सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सैन्य अभियान के लिए भौगोलिक स्थिति और मानव भूगोल को समझना बहुत जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के तीन घेरों के बारे में भी बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि किसी देश की सुरक्षा केवल सेना पर नहीं बल्कि कूटनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक पर भी निर्भर करती है।
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सीडीएस जनरल अनिल चौहान - फोटो : एक्स/एएनआई/वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि सैन्य भौगोलिक स्थिति (मिलिट्री जियोग्राफी) बहुत अहम है। जब भी आप किसी चीज का मूल्यांकन कर रहे हैं, तो सबसे पहले आप इलाके का विश्लेषण करते हैं। फिर आप सामने की ताकत को समझते हैं, उसके बाद समय और स्थान को देखते हैं। भू-राजनीतिक स्तर पर किसी देश का स्थान ही उसकी अहमियत तय करता है। सभी (सैन्य) अभियान ऐसे माहौल में होते हैं, जिसमें भौतिक भूगोल और मानव भूगोल शामिल होते हैं। मानव भूगोल युद्ध को समझना, खासकर विद्रोह के खिलाफ कार्रवाई और जवाबी ऑपरेशनों में, महत्वपूर्ण है। यह इसलिए जरूरी है ताकि आप समझ सकें कि आप कहां अभियान कर रहे हैं। 
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राजधानी दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनरल चौहान ने आगे कहा, यह मेरे सैन्य दृष्टिकोण और विचार हैं और मेरा मकसद भारतीय सेना के मध्य और जूनियर स्तर के नेतृत्व के साथ संबंध स्थापित करना और उनसे जुड़ना है। यह इसलिए अहम है क्योंकि हम जो सुधार करने का प्रयास कर रहे हैं, उसका दायरा और प्रकृति बहुत बड़ा है, इसलिए हम सभी की एक राय होनी चाहिए। 
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उन्होंने कहा, मैं राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के तीन घेरों को समझाने की कोशिश करूंगा। सबसे बाहरी घेरा यह बताता है कि किसी मिशन को कैसे सुरक्षित रखा जाए। फिर बीच वाला घेरा है, जो इसका हिस्सा है और यह बताता है कि आप अपने मिशन की रक्षा कैसे करेंगे और इसके केंद्र में मिशन की सैन्य तैयारियों की बात होती है। ये घेरे राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, रक्षा रणनीति या सैन्य रणनीति तैयार करने में मदद कर सकते हैं। हमारा काम यह देखना है कि भविष्य में युद्ध कैसे होंगे, संचालन का वातावरण क्या होगा, किस तरह के खतरे और चुनौतियां आएंगी, खुद को तैयार करना और प्रशिक्षण लेना। यही सब सैन्य तैयारियों होती हैं। इसके अलावा, एक देश की रक्षा पहचान और रणनीतिक संस्कृति भी होती है। किसी राष्ट्र की सुरक्षा केवल सेना पर नहीं, बल्कि कूटनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक पर भी निर्भर करती है। 

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