खुफिया इनपुट का विश्लेषण करने के लिए नेटग्रिड के पास देश में आने वाले और यहां से जाने वाले हर देशी-विदेशी व्यक्ति का डाटा होगा। इसके अलावा बैंकिंग व वित्तीय लेनदेन, क्रेडिट कार्ड खरीदारी, मोबाइल व फोन, व्यक्तिगत करदाताओं, हवाई यात्रियों, रेल यात्रियों के डाटा तक भी इसकी पहुंच होगी।
बैंकिंग लेनदेन और इमिग्रेशन का डाटा नेटग्रिड में ‘रियल टाइम मैकेनिज्म’ के तहत तत्काल उपलब्ध होगा। पहले चरण में नेटग्रिड से 10 यूजर एजेंसियों और 21 सेवा प्रदाताओं को जोड़ा गया है। बाद में 950 अन्य संगठनो को भी इससे जोड़ा जाएगा, जबकि आने वाले सालों में करीब 1000 अन्य संगठनों को इससे जोड़ने की योजना है।
इन सुरक्षा एजेंसियों को मिलेगा डाटा
इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), रिसर्च एंड एनालसिस विंग (रॉ), सीबीआई, ईडी, डीआईआई, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू), सीबीडीटी, सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एंड कस्टम (सीबीईसी), डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज एंड इंटेलिजेंस (डीजीसीईआई) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी)
नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड के गठन की योजना देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 2008 में हुए भयानक आतंकी हमले के बाद बनी थी। उस समय माना गया था कि रियल टाइम डाटा एनालसिस मैकेनिज्म नहीं होने के चलते ही इस हमले के लिए रेकी करने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड हैडली के 2006 से 2008 के बीच देश में कई बार आने-जाने की निगरानी नहीं हो सकी थी।
हैडली के इन दौरों से मिले वीडियो और अहम जानकारियों की बदौलत लश्कर-ए-ताइबा के आतंकी मुंबई में समुद्री रास्ते से घुसकर भयानक तबाही मचाते हुए 166 लोगों को मार पाए थे।
फाइलों में दबी योजना को मोदी ने कराया दोबारा शुरू
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार की कैबिनेट कमेटी (सुरक्षा) ने 8 अप्रैल, 2010 को नेटग्रिड बनाने को मंजूरी दी थी। लेकिन 2012 तक इसके गठन का काम फाइलों में दब गया था। सूत्रों का कहना है कि 2014 में प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने 10 जून, 2016 को इस योजना की जानकारी मिलने पर दोबारा काम शुरू कराया था। इसके बाद से ही पूरा सिस्टम तैयार किया जा रहा है।