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CIC: सार्वजनिक होगी 'नाता प्रथा' पर रिपोर्ट, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश

Thu, 02 Apr 2026 09:18 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

CIC: केंद्रीय सूचना आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से नाता प्रथा पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट जनता के लिए साझा करने का आदेश दिया है।'नाता प्रथा' में लड़कियों को शादी के नाम पर बेचा जाता है, जिसे एनएचआरसी ने अनैतिक और सामाजिक बुराई बताया था। पढ़िए रिपोर्ट-
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केंद्रीय सूचना आयोग - फोटो : cic.gov.in
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विस्तार
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'नाता प्रथा' एक बार फिर चर्चा में है। इसमें लड़कियों को विवाह के नाम पर स्टांप पेपर या अनौपचारिक समझौतों के जरिये 'बेचा' जाता है। केंद्रीय सूचना आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को दी गई कार्रवाई रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।
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हाल ही में दिए आदेश में सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने कहा, मंत्रालय को आरटीआई आवेदन पर दोबारा विचार करना चाहिए और एनएचआरसी को दी गई कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध करानी चाहिए। हालांकि, इसमें गोपनीय हिस्सों को हटाया जा सकता है।

आरटीआई आवेदन में मांगी गई जानकारी पर सीआईसी ने क्या कहा?
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा कि अपीलकर्ता की ओर से मांगी गई अन्य जानकारी नहीं दी जा सकती, क्योंकि उसमें शिकायतकर्ताओं और उनके परिवारों की निजी जानकारी शामिल है, जो आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत साझा नहीं की जा सकती। आरटीआई आवेदन में मंत्रालय, एनएचआरसी और राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात सरकारों के बीच हुए पत्राचार की प्रतियां और इस मामले पर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई थी।
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आयोग ने कहा कि निजी जानकारी साझा नहीं की जा सकती। लेकिन एनएचआरसी को दी गई कार्रवाई रिपोर्ट जनहित से जुड़ा मामला है, इसलिए उसे संशोधित रूप में साझा किया जाना चाहिए।

एनएचआरसी ने नाता प्रथा को बताया था सामाजिक बुराई
एनएचआरसी ने 6 जून 2024 के अपने बयान में इस प्रथा को 'सामाजिक बुराई' बताते हुए गंभीर चिंता जताई थी। उसने कहा था कि 'नाता प्रथा' के तहत कुछ समुदायों में लड़कियों को शादी के नाम पर स्टांप पेपर या अन्य तरीकों से बेचा जाता है, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है और यह प्रथा राजस्थान और उसके आसपास मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ इलाकों में पाई जाती है।

इस प्रथा को 'अनैतिक' और 'अमानवीय' बताते हुए एनएचआरसी ने इसे खत्म करने की मांग की थी। एनएचआरसी ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और संबंधित राज्यों को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा था। मंत्रालय ने एनएचआरसी को बताया था कि यह प्रथा महिलाओं के लिए अपमानजनक है और इसे खत्म किया जाना चाहिए।

नाबालिग को ढाई लाख में बेचने के मामले का जिक्र
एनएचआरसी ने एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें राजस्थान में एक नाबालिग लड़की को उसके पिता ने 'नाता प्रथा' के तहत ढाई लाख रुपये में शादी के लिए बेच दिया था। यह सौदा गांव वालों की मौजूदगी में परिवारों के बीच हुआ था। पहले 60 हजार रुपये दिए गए। लेकिन बाकी रकम समय पर नहीं मिलने पर पिता लड़की को वापस ले आया और उसका 'नाता' दूसरी जगह 32 हजार रुपये में तय कर दिया।

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लड़की ने इसका विरोध किया और पहले व्यक्ति के पास वापस चली गई। बाद में उसने पिता पर परेशान करने और धमकी देने का आरोप लगाया और जून 2020 में आत्महत्या कर ली। एनएचआरसी ने अपने शोध विभाग के हवाले से कहा कि इस प्रथा को रोकने के लिए सख्त कानून की जरूरत है और 'नाता प्रथा' को खत्म करने के लिए विशेष कानून बनाने की सिफारिश की।
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उसने यह भी कहा कि महिलाओं को ऐसे समझौतों में मजबूर करने वालों पर मानव तस्करी से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए और नाबालिगों के मामलों में पॉक्सो कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि इस 'खतरे' पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।




 
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