महाराष्ट्र के नासिक से एक ऐसी खबर आई है जिसने कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। दरअसल, यहां के एक बीपीओ यूनिट में काम करने वाली महिलाओं के साथ यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण की कोशिशों का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने अब तक कुल 9 मामले दर्ज किए हैं और आठ आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
'ये सब तो चलता है'
नासिक पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में कंपनी की एचआर मैनेजर और ऑपरेशंस हेड की भूमिका सबसे ज्यादा शर्मनाक रही है। जब एक पीड़िता ने आपबीती सुनाई, तो बजाए मदद करने के, महिला अधिकारियों ने यह कहकर उसे डराने की कोशिश की कि कॉर्पोरेट में ये सब चीजें आम हैं। पुलिस का कहना है कि इन महिला अधिकारियों ने न केवल आरोपियों का साथ दिया, बल्कि पीड़ितों को शिकायत करने से भी हतोत्साहित किया।
चल रहा था सात पुरुषों का सिंडिकेट
जांच में यह बात सामने आई है कि सात पुरुष आरोपी एक सोचे-समझे नेटवर्क की तरह काम कर रहे थे। ये आरोपी महिलाओं का मानसिक और शारीरिक शोषण करने के साथ-साथ उन पर धर्म परिवर्तन का भी दबाव बनाते थे। पुलिस ने अब तक दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसार और शाहरुख शेख को गिरफ्तार किया है। वहीं, महिला ऑपरेशंस मैनेजर को 28 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि एचआर मैनेजर निदा खान फिलहाल फरार है।
जांच में जुटी एजेंसियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसमें राज्य खुफिया विभाग (एसआईडी), एटीएस और एनआईए ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि जांच इस दिशा में भी चल रही है कि क्या इस गिरोह के तार किसी कट्टरपंथी संगठन या विदेशी फंडिंग से जुड़े हैं।
टाटा संस ने जताया ऐतराज
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस घटना को व्यथित करने वाला बताया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि टीसीएस की सीओओ आरती सुब्रमण्यन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय आंतरिक जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की विशेष जांच दल अब अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है। काउंसिलिंग के बाद कई और महिला कर्मचारी भी अपनी शिकायतें लेकर सामने आई हैं, जिसके बाद आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
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