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Maharashtra: 1995 के धोखाधड़ी के मामले में महाराष्ट्र के मंत्री माणिकराव कोकाटे को राहत, दोषसिद्धि पर लगी रोक

Wed, 05 Mar 2025 02:22 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मजिस्ट्रेट अदालत ने पिछले महीने माणिकराव कोकाटे और उनके भाई को दोषी ठहराया था, जबकि इसी मामले में दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। यह मामला 1995 में पूर्व मंत्री टीएस दिघोले की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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नासिक की अदालत ने 1995 के धोखाधड़ी के एक मामले में महाराष्ट्र के मंत्री माणिकराव कोकाटे की दोषसिद्धि पर रोक लगाई। मजिस्ट्रेट अदालत ने 20 फरवरी को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा) नेता और उनके भाई सुनील कोकाटे को दोषी ठहराया था।

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कोर्ट से सरकारी कोटे के तहत फ्लैट पाने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा करने से संबंधित मामले में उन्हें दो साल की सजा सुनाई गई थी। बाद में भाइयों ने जिला न्यायाधीश 1 और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (नासिक) एन वी जीवने के समक्ष मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली एक अपील दायर की। सत्र अदालत ने बुधवार को उनकी अपील स्वीकार कर ली।

पिछले महीने माणिकराव कोकाटे और उनके भाई को दोषी ठहराया
मजिस्ट्रेट अदालत ने पिछले महीने माणिकराव कोकाटे और उनके भाई को दोषी ठहराया था, जबकि इसी मामले में दो अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। यह मामला 1995 में पूर्व मंत्री टीएस दिघोले की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
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अभियोजन पक्ष की दलील
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, माणिकराव कोकाटे और उनके भाई को मुख्यमंत्री के 10 प्रतिशत विवेकाधीन कोटे के तहत नासिक के येओलकर माला क्षेत्र में कॉलेज रोड पर निम्न आय वर्ग (एलआईजी) वाले दो फ्लैट आवंटित किए गए थे। 

क्या हैं आरोप?
आरोप है कि उन्होंने एलआईजी श्रेणी से संबंधित होने तथा शहर में अपना कोई मकान न होने का झूठा दावा किया। दिघोले की ओर से पुलिस से संपर्क करने के बाद नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस थाने में कोकाटे भाइयों और दो अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य अपराधों का मामला दर्ज किया गया था।

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