अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा अगले साल सूरज की ओर एक अंतरिक्षयान भेजेगा। यह सूरज के बारे में जानने की लालसा के तहत दुनिया का पहला मिशन है। नासा के वैज्ञानिकों का दावा है कि यह मिशन हमारे सौरमंडल के जन्मदाता कहे जाने वाले सूरज के वातावरण के बारे में जानकारी देगा। साथ ही सौरमंडल के इस तारे की भौतिकी क्या है?
यह किस तरीके से काम करता है? छह दशक से सूरज पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों के इस तरह के प्रश्नों की जिज्ञासा भी मिटाएगा। सूरज की यह यात्रा मानव सभ्यता की पहली यात्रा होगी। नासा ने कहा है कि जुलाई 2018 में इस अंतरिक्ष यान को लॉन्च करने की तैयारी की जा रही है।
अंतरिक्षयान ‘पार्कर सोलर प्रोब’ सूरज की कक्षा के करीब 40 लाख मील के घेरे में प्रवेश करेगा यानी उसके सौर वातावरण तक जाएगा। इस दौरान अंतरिक्षयान जितनी गर्मी और विकिरण का सामना करेगा, आज तक किसी भी मानव द्वारा निर्मित वस्तु ने नहीं किया है।
सूरज का सबसे बाहरी हिस्सा ‘कोरोना’ किस तरह गर्म होता है और इसके पीछे की प्रक्रिया क्या है? इस बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जाएगी। सोलर प्रोब प्लस को सूरज के ताप से बचान के लिए इसमें स्पेशल कार्बन कंपोजिट हीट शिल्ड लगाई गई है।
इस हीट शिल्ड की मोटाई 11.43 सेमी है। सूरज की बाहरी कक्षा इसकी सतह के मुकाबले सैकड़ों गुना ज्यादा गर्म होती है। इसका तापमान 5 लाख डिग्री सेल्सियस या इससे भी ज्यादा हो सकता है।
जीवित रहते मिला सम्मान
यान का नाम खगोलशास्त्री यूजीन पार्कर के नाम पर रखा गया है। पार्कर ऐसे पहले शख्स हैं, जिन्हें जीवित रहते हुए यह सम्मान दिया गया है। पार्कर ने 1950 में सौर हवा के अस्तित्व की भविष्यवाणी की थी।