वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में भी हानिकारक रसायनों के होने के सबूत मिले हैं। एक अध्ययन के अनुसार, आईएसएस पर लगे एयर फिल्टरों से एकत्रित धूल में खतरनाक रसायन मिले हैं। इनकी मात्रा ज्यादातर अमेरिकी घरों की धूल में मौजूद हानिकारक रसायनों से भी ज्यादा है।
शोधकर्ता जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि धूल में मौजूद कार्बनिक दूषित पदार्थों का स्तर किसी आम अमेरिकी या पश्चिमी यूरोपीय घरों में पाए जाने वाले हानिकारक पदार्थों की तुलना में अधिक है। बर्मिंघम विश्वविद्यालय और नासा ग्लेन रिसर्च सेंटर (यूएसए) के शोधकर्ताओं के अध्ययन के नतीजे जर्नल एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी लैटर्स में प्रकाशित हुए हैं।
ये हानिकारक पदार्थ मिले
शोध के दौरान वैज्ञानिकों को स्पेस डस्ट में पॉलीब्रोमिनेटेड डिफेनिल ईथर (पीबीडीई), ऑर्गनोफॉस्फेट एस्टर (ओपीई), ब्रोमिनेटेड फ्लेम रिटार्डेंट्स (बीएफआर), पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच), पेरफ्लूरो एल्किल सब्सटांस (पीएफएएस) और पॉलीक्लोराइनेटेड बाइफिनाइल्स (पीसीबी) जैसे हानिकारक पदार्थ मिले हैं। इनमें से बीएफआर और ओपीई का उपयोग विभिन्न देशों में इलेक्ट्रॉनिक्स, भवनों में इन्सुलेशन के साथ-साथ फर्नीचर और कपड़े जैसे उत्पादों के अलावा आग से बचाव के लिए बनाए गए उत्पादों में किया जाता है। पीएएच हाइड्रोकार्बन ईंधन में मौजूद होते हैं जो जलने से मुक्त होते हैं। पीसीबी का उपयोग निर्माण सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है, जबकि पीएफएएस का उपयोग कपड़ों पर दाग हटाने के लिए किया जाता है। इनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए इनमें से कुछ को प्रतिबंधित और कुछ का उपयोग सीमित कर दिया गया है।
यह हो सकती है वजह
वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष यात्रियों के अंतरिक्ष स्टेशन पर व्यक्तिगत उपयोग के लिए लाए गए कैमरे, एमपी3 प्लेयर, टैबलेट, चिकित्सा उपकरण और कपड़े जैसी रोजमर्रा की चीजें इन रसायनों का संभावित स्रोत हो सकती हैं। शोध के अनुसार, आईएसएस के अंदर हवा हर आठ से 10 घंटे में पुनःप्रसारित की जाती है। इसी तरह वहां मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड और अन्य गैसीय प्रदूषकों को हटाया जाता है। इसके बावजूद यहां हानिकारक रसायन कैसे एकत्रित हो गए, इस बारे में ठोस जानकारी नहीं है। इस विषय पर और गहराई से शोध किया जा रहा है।