सरकार किसानों के साथ बातचीत शुरू करने का प्रयास कर रही है या नहीं, इस पर केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि भारत सरकार किसानों से पूरी संवेदना के साथ चर्चा करती रही है। आज भी जब उनका कोई मत (विचार) आएगा, तो भारत सरकार हमेशा किसानों के साथ चर्चा करने को तैयार है।
हजारों की संख्या में किसान, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कियान पिछले करीब तीन महीने से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं। वे केंद्र के कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग कर रहे हैं।
सरकार की 41 किसान संगठनों के साथ 22 जनवरी को हुई 11वें दौर की बातचीत आंदोलनकारियों द्वारा केंद्र का प्रस्ताव पूरी तरह ठुकराए जाने के बाद से रुकी हुई है।
केंद्र ने किसानों को प्रस्ताव दिया है कि तीनों कानूनों को डेढ़ साल तक स्थगित करके उस अवधि में संयुक्त समिति गठित कर सभी चिंताओं को दूर किया जाए, लेकिन किसान कानूनों को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
20 जनवरी को हुई 10वें दौर की बातचीत में केंद्रने उक्त पेशकश करते हुए आंदोलन कर रहे किसानों को घर लौटने और दिल्ली की सीमाएं खाली करने को कहा था।
किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानूनों के कारण मंडियां और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद समाप्त हो जाएगी और किसान बड़े कॉरपोरेट के भरोसे पर रह जाएगा। हालांकि सरकार ने इन्हें सिर्फ भ्रम करार दिया है।