प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से सीधे बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'बहुत से सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के साथ सीधे तौर पर बातचीत करना काफी शानदार रहा। इससे सरकारी योजनाओं के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानने को मिलता है वहीं हमें भी उन क्षेत्रों के बारे में पता चलता है जहां सुधार किया जा सकता है। आज मैं प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से बातचीत करके खुश हूं।'
मोदी ने कहा, 'हर किसी शख्स को अपने घर की इच्छा होती है। जब किसी को घर मिलता है तो वह बहुत खुश हो जाता है। आवास योजना ईंट और पत्थरों के बारे में नहीं है। यह एक बेहतर गुणवत्ता और सपने के सच होने के बारे में है। एनडीए सरकार ने
हाउसिंग सेक्टर को अत्यंत महत्ता दी है। हम इस बात को सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि 2022 तक हर भारतीय के पास घर हो। उसी साल हम अपनी स्वतंत्रता के 75 साल पूरे कर रहे हैं।'
पीएम
मोदी ने कहा, 'हम हाउसिंग सेक्टर को बिचौलिए, भ्रष्टाचार और हर लाभार्थी को बिना किसी परेशानी के अपना घर दिलाने की कोशिश करते हुए काम कर रहे हैं। हाउसिंग सेक्टर को नवीनतम तकनीक के साथ मजबूती प्रदान की जा रही है। यह शहरों और गांवों में गरीबों के लिए किफायती घरों के तेजी से निर्माण को सक्षम बनाता है। हमारा ध्यान और ज्यादा महिलाओं, दिव्यांग भाई और बहनों. एससी/ एसटी, ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्ग के समुदाय की घरों तक पहुंच करवाना है।'
बातचीत के दौरान मोदी ने कहा, 'यूपीए सरकार के दौरान लाभार्थियों को बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) की सूची के दौरान चुना जाता था। हमने सामाजिक-आर्थिक-जाति-सूचकांक के तहत चुनना शुरू किया। इसके जरिए हमने उन लाभार्थियों को जोड़ा जो पहले छूट गए थे। आवास योजना के तहत लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। ठीक उसी समय हम स्किल डेवलेपमेंट पर काम कर रहे हैं ताकि बेहतर गुणवत्ता वाले घरों का निर्माण हो सके।'
पीएम ने कहा, 'पहले देखने को मिलता था कि बिल्डर पैसे तो ले लेते थे, लेकिन सालों तक एक ईंट भी नहीं लगाते थे। हमने रेरा कानून लागू किया, इस कानून से खरीदारों को उनका हक मिल रहा है। पीएम ने कहा कि अब तक एक कहावत थी- 'एक जिंदगी बीत जाती है अपना घर बनाने में', पर अब सरकार दूसरी है और इस कहावत को बदलने की जरूरत है। अब कहावत होगी- 'अब जिंदगी बीतती है, अपने ही आशियाने में।