उत्तर प्रदेश में सरकार बनने से पहले ही विकास कार्यों को गति देने में केंद्र सरकार जुट गई है। केंद्र की रणनीति पहले से चल रही केंद्रीय योजनाओं को जमीन पर उतारने की है। इसकी शुरुआत केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने की है। मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को प्रदेश के एक लाख से ज्यादा आबादी के 61 शहरी निकायों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिये चार हजार करोड़ रुपये से ज्यादा को मंजूरी दे दी। अगले तीन सालों में इससे जलापूर्ति, सीवेज नेटवर्क समेत दूसरे विकास कार्य होंगे।
शहरी विकास मंत्रालय शहरों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिये मिशन अमृत पर काम रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश में एक लाख से ज्यादा आबादी वाले 61 शहर शामिल हैं। केंद्र सरकार की योजना है कि 2020 तक इन शहरों में रोजाना हर व्यक्ति को 135 लीटर पानी मुहैया कराया जाए। साथ ही हर घर सीवेज नेटवर्क से जुड़ा हो। मंत्रालय अब आगामी तीन सालों के लिये एक साथ विकास योजनाओं को हरी झंडी दिखा रहा है।
मंत्रालय अधिकारी बताते हैं कि बृहस्पतिवार को वित्तीय वर्ष 2017-20 के लिये 4,239 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं को मंजूरी दी। इसमें से 1,996 करोड़ रुपये से 46 शहरों में जलापूर्ति से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम होगा। वहीं, 47 शहरों में 2,149 करोड़ रुपये से सीवेज नेटवर्क प्रोजेक्ट का विकास होगा। दूसरी तरफ 61 शहरों में 94 करोड़ रुपये से हरियाली बढ़ायी जायेगी। इसके साथ ही 2015-20 के पांच साल के मिशन अमृत पर 11,421 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें 4,922 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता के तौर पर होंगे।
प्रमुख शहर, जहां होगा बुनियादी सुविधाओं का विकास
जलापूर्ति: लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, मेरठ समेत 46 शहर।
सीवेज: लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा, गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ, गोरखपुर समेत 47 शहर।
सभी 61 शहरों में हरित क्षेत्र, ग्रीन परिवहन आदि का होगा विकास।
बनारस को मिला 26 करोड़
मंत्रालय ने मिशन हृदय के तहत हेरीटेज शहर बनारस के विकास के लिए 26.54 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है। इससे पुरानी काशी जोन में करीब 6000 एलईडी लाइट लगेगी। मंत्रालय अधिकारी बताते हैं कि अभी तक मिशन के तहत वनारस के विकास के लिये 84 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गयी है। इसमें से बड़ा हिस्सा सड़कों के विकास पर खर्च होगा। इसके बाद शहर के 86 विरासत स्थलों को सजाया जाएगा।