प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही अल्पसंख्यकों का भरोसा जीतने की बात कर चुके हैं। आज जबकि नई कैबिनेट की बैठक होने जा रही है, मुसलमानों की निगाह इस बात पर टिकी है कि अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने के लिए सरकार क्या फैसले ले सकती है? भाजपा सरकार के एजेंडे में एक तरफ तो मुसलमानों को शिक्षा-रोजगार देकर उन्हें मजबूत बनाने की बात है तो दूसरी तरफ तीन तलाक, राममंदिर और जनसंख्या नीति भी उसके एजेंडे में है जिसे मुसलमान शक की निगाह से देखता रहा है। ऐसे में मुसलमान सरकार पर कितना भरोसा कर पायेगा, यह देखने वाली बात होगी।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुकी ने अमर उजाला से कहा कि सरकार शुरू से अल्पसंख्यकों का भरोसा जीतने की बात करती रही है। अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति देने की घोषणा कर उसने अपने इरादे भी जता दिए हैं। अगर सरकार वाकई इसे अमल में लाती है और मुसलमानों का भला होता है तो वे निश्चित रूप से सरकार का समर्थन करेंगे। लेकिन सरकार तीन तलाक पर दोबारा ‘गलत’ तरीके से कानून लाती है तो वे उसकी मुखालफत करेंगे। कमाल फारुकी ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम पक्ष में सबसे बड़ा मुद्दा राम मंदिर का रहा है, लेकिन वे चाहते हैं कि सरकार पहले शिक्षा और रोजगार के उन मुद्दों के साथ आगे बढ़े जिन पर कोई विवाद नहीं हैं और जिससे मुसलमानों का भला होगा। हर आयोग मुसलमानों के गरीब और पिछड़ा होने की बात करता रहा है, इसलिए अगर सरकार इसे अपना एजेंडा बनाती है तो यह स्वागतयोग्य कदम है। उनके मुताबिक मंदिर मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के भरोसे पर ही छोड़ देना चाहिए। वह जो भी फैसला करे, वह सबको स्वीकार होना चाहिए।
वहीं, मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक पर कठोर कानून की हिमायती ‘मेरा हक फाउंडेशन’ की अध्यक्ष फरहत नकवी कहती हैं कि उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार से पहले ही पत्र लिखकर तीन तलाक पर कठोर कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अपनी व्यक्तिगत दुकानदारी चलाने के लिए कुछ लोगों ने मुसलमान समाज को गुमराह कर रखा है, जबकि समाज को मोदी सरकार के विकासवादी एजेंडे पर खुलकर साथ आना चाहिए क्योंकि पहली बार उनकी शिक्षा-रोजगार के लिए कोई सरकार जमीनी काम कर रही है। उनके मुताबिक अल्पसंख्यक लड़कियों के लिए आधी छात्रवृत्ति तय कर देने से महिलाओं में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा। इससे वे एक घरेलू महिला बनकर सिर्फ बच्चा पैदा करने की सोच से आगे बढ़कर देश की तरक्की में सहायक बनेंगी और समाज की दकियानूसी सोच पीछे छूटेगी।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी सरकार केवल और केवल विकासवादी एजेंडे की बात कर रही है। वह पूरे देश के विकास की बात कर रही है लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय की तरक्की के बिना देश की पूरी तरक्की संभव नहीं है। इसलिए अगर सरकार ने पांच करोड़ अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति देकर उन्हें आगे बढ़ाने का काम किया है तो समाज को इसका स्वागत करना चाहिए।