प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही तरह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी आम चीनी जनता में बेहद लोकप्रिय हैं। चीन की जनता मानती है कि चेयरमैन माओत्सेतुंग आधुनिक चीन के संस्थापक थे तो तंग शियाओ फंग आधुनिक चीन के निर्माता और अब शी जिनपिंग जिन्हें चीनी आदरपूर्वक शी ता..दा.. कहकर बुलाते हैं, तीसरे बड़े नेता हैं जिनके नेतृत्व में चीन पूरी दुनिया में सीना तान कर खड़ा है और लगातार आगे बढ़ रहा है। चीन को उम्मीद है कि मोदी और शी मिलकर एशिया की तस्वीर बदल सकते हैं।
चीनी मानते हैं कि भले ही भारत और चीन के बीच कुछ विरोधाभासी मुद्दे और सीमा विवाद है, लेकिन राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संबंधों की जो निजी कैमिस्ट्री है और जिस तरह दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति आदि क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ रहा है, उससे विवादित मुद्दों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। कई चीनी रणनीति विशेषज्ञ यहां तक मानते हैं कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो ये दोनों नेता सीमा विवाद का भी कोई एसा हल निकाल लेंगे जो दोनों देशों को मान्य होगा।
भारत में चीन के पूर्व राजदूत रहे सुन यू शी तो सीमा विवाद को लेकर इतने भावुक हो जाते हैं कि यहां तक कहते हैं कि क्या चीन और भारत के बीच सीमाएं होनी चाहिए। सुन कहते हैं कि वह खुद तीन दौर की सीमा विवाद वार्ता में शामिल रहे हैं और महसूर करते हैं कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद आसानी से हल हो सकता है अगर पश्चिमी नजरिए की बजाय समस्या को भारत चीन के नजरिए से देखा जाए। उनका कहना है कि प्राचीन काल से ही दोनों देशों के बीच विद्वानों, नागरिकों, व्यापारियों, भिक्षुओं का बेरोकटोक आवागमन रहा है, लेकिन अंग्रेजों ने सीमाएं बनाकर भारत चीन के बीच सीमा विवाद पैदा कर दिया।