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2019 में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी और नितिन गडकरी दो दावेदार ?

Mon, 28 Jan 2019 09:56 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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Nitin Gadkari, PM Modi
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प्रस्तावित लोकसभा चुनाव-2019 में भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी। नारा भी अबकी बार फिर मोदी सरकार तय हो गया है। प्रधानमंत्री ने खुद-हाऊ इज द जोश का फार्मूला दे दिया है, लेकिन प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह चुनाव के नतीजे पर निर्भर करेगा। 
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यह चर्चा अब भाजपा के कुछ सांसदों से लेकर केंद्र सरकार के मंत्रियों की जुबान पर आने लगी है। हालांकि कोई ऑन दि रिकार्ड बोलने के लिए तैयार नहीं है। दिलचस्प यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों में भी इसकी चर्चा तेज है।

संघ की धारा से जीवन के आखिरी पड़ाव में अलग हुए कुछ स्वयंसेवकों, प्रचारकों को भी नितिन गड़करी में काफी उम्मीद दिखाई पड़ रही है। 90 के दशक के एक मशहूर प्रचारक को भी इसमें कोई आश्चर्य नहीं दिखाई दे रहा है। गोरक्षपीठाधीश्वर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखनाथ मंदिर के कई कर्ता धर्ताओं में से एक की माने तो यह समय पर निर्भर करेगा। 
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225 से भाजपा की कम सीटें आने पर निश्चित रूप से संघ की तरफ से नितिन गड़करी को प्रधानमंत्री के तौर पर पेश किया जा सकता है। इलाहाबाद के कुंभ मेले में आ रहे संघ के नेताओं की आगवानी में व्यस्त प्रमुख सूत्र का कहना है कि ऐसा संभव है। सूत्र का कहना है कि कुंभ में राम मंदिर निर्माण बड़ा मुद्दा है। गंगा की सफाई भी। सूत्र कहना है कि इसको लेकर लोगों के बीच से उठ रहे सवाल का जवाब तलाशना मुश्किल हो रहा है।

प्रधानमंत्री बनाम नितिन गड़करी

संघ और भाजपा में गहरी दिलचस्पी लेने वाले एक प्रमुख सूत्र के अनुसार नितिन गड़करी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत समेत अन्य के प्रिय हैं। गड़करी के बारे में आम है कि वह केंद्र सरकार के सबसे अव्वल परफॉर्मिंग मिनिस्टर हैं। उनकी सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं में काफी अच्छी पैठ हैं। उदार चेहरा माने जाते हैं। भाजपा के कुछ सांसदों को लग रहा है कि लोकसभा में सीटें कम आने पर वह आसानी से मैनेज कर सकते हैं। 

केंद्र सरकार के एक वित्त राज्यमंत्री का कहना है कि 2019 में सरकार तो भाजपा की ही बनेगी। हां, यह हो सकता है कि प्रधानमंत्री कोई और बन जाए। हालांकि सभी का कहना है कि प्रधानमंत्री भाजपा के नेताओं, केंद्र सरकार के मंत्रियों, पार्टी के सांसदों को एक सूत्र में बांधने में सफल रहे हैं। मोदी सरकार ने बहुत काम किया है और देश में बड़े बदलाव को आगे बढ़ाया है। उनके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत मिलने का भरोसा है।
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नहीं पटती

खबर अंदरखाने से है। संघ के सूत्रों से हैं। वह मानते हैं कि नितिन गडकरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के समीकरण अच्छे नहीं है। नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच में दूरी बढ़ाने वाला भी माना जा रहा है। नितिन गडकरी स्टैंड लेने वाले नेता हैं और माना जा रहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के तौर-तरीके कम सुहाते हैं। 

हालांकि ऐसे सभी मुद्दों पर कोई ऑन द रिकार्ड नहीं बोलना चाहता। पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री के स्तर से गडकरी के मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भी कुछ ठहराव सा देखा जा रहा है। हाई-वे, परियोजना आदि के उद्घाटन विज्ञापन में भी प्रधानमंत्री की अकेले तस्वीर प्रकाशित हो रही है। सूत्र बताते हैं कि इसे भी प्रधानमंत्री कार्यालय बारीकी से देखकर अंतिम रूप देता है। इसके अलावा गड़करी के बयान भी भाजपा और प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के लिए लगातार परेशानी पैदा करने वाले आ रहे हैं।
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