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भ्रमित वामपंथी से नारायणमूर्ति ऐसे बने दयालु पूंजीवादी, बुल्गारिया की घटना को किया याद

Mon, 06 Jan 2020 01:07 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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n. r. narayana murthy - फोटो : social media
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देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति ने रविवार को आईआईटी मुंबई के टेक फेस्ट में अपने दयालु पूंजीवादी बनने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने 1974 की सर्बिया और बुल्गारिया की कड़वे अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि इसी घटना ने उन्हें  भ्रमित वामपंथी से दयालु पूंजीवादी में बदल दिया। जिसके बाद उन्होंने इन्फोसिस की स्थापना की।

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नारायणमूर्ति ने बताया कि मैं ट्रेन में एक लड़की से बातचीत कर रहा था, जो केवल फ्रेंच समझ सकती थी। हम बुल्गारिया में जीवन के बारे में बात कर रहे थे। इस दौरान लड़की का दोस्त वहां से उठा और पुलिस लेकर आ गया। इसके बाद बुल्गारियाई गार्ड ने मेरा पासपोर्ट, सामान सब जब्त कर लिया और मुझे घसीटकर बाहर ले गए। उन्होंने मुझे एक छोटे से कमरे में बंद कर दिया। 

उन्होंने बताया कि अगले दिन पुलिस उन्हें प्लेटफार्म पर ले गई और एक मालगाड़ी के गार्ड के डिब्बे में धक्का देकर बैठा दिया। तब पुलिस के जवान ने कहा कि तुम मित्र देश से हो, इसलिए हम तुम्हें जाने दे रहे हैं। इस्तांबुल पहुंचने पर तुम्हारा पासपोर्ट तुम्हें दे देंगे। 
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उन्होंने कहा कि तभी मैंने सोच लिया था कि अगर कोई देश दोस्त के साथ ऐसा बर्ताव करता है, तो मैं कभी भी एक कम्युनिस्ट देश का हिस्सा नहीं बनना चाहूंगा। मूर्ति ने कहा कि इस घटना ने मुझे भ्रमित वामपंथी की जगह दयालु पूंजीपित बना दिया।

उचित आय वाले रोजगार से ही भारत में असमानता को कम किया जा सकता है: नारायणमूर्ति
नारायणमूर्ति ने कहा कि भारत जेसे देश में असमानता को रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करके ही दूर किया जा सकता है। रोजगार के ये अवसर पर्याप्त आय देने वाले होने चाहिये तभी असमानता की स्थिति से निपटा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत में 65 करोड़ लोग यानी 58 प्रतिशत कृषि क्षेत्र पर निर्भर हैं जो कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 14 प्रतिशत का योगदान करता है। उन्होंने कहा कि दूसरे शब्दों में कहा जाय कि भारत की प्रति व्यक्ति आय यदि 2,000 डालर है तो कृषि क्षेत्र में काम करने वालों की आय मुश्किल से सालाना 500 डालर होगी। क्योंकि ये 58 प्रतिशत लोग देश की जीडीपी में केवल 14 प्रतिशत का योगदान करते हैं।

मूर्ति ने कहा कि 500 डालर सालाना की यह आय 1.5 डालर प्रतिदिन बैठती है यानी 100 रुपये प्रति दिन के करीब होती है। कृषि क्षेत्र में काम करने वालों को इसी आय में अपना खाना, पीना, स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों की देखभाल करनी है और किराया भी देना है। इस लिहाज से भारत में गरीबी से लोगों को निकालने के लिये उन्हें कृषि क्षेत्र से हटाकर निम्न- प्रौद्योगिकी सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र में लगाने की जरूरत है जहां उन्हें 1,500 से 2,000 डालर सालाना तक मिल सकते हैं।

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