महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ सभी आरोप वापस ले लिए हैं, इसको लेकर अब महाराष्ट्र में राजनीति तेज होती जा रही है। महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने मंगलवार को आरोप लगाया कि एकनाथ शिंदे सरकार ने पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार की छवि खराब करने के इनाम के तौर पर परमबीर सिंह के खिलाफ आरोप हटा दिए।
पत्रकारों से बात करते हुए नाना पटोले ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जानबूझकर मामले को कमजोर किया और यह सुनिश्चित किया कि आईपीएस अधिकारी तकनीकी आधार पर मुक्त हो जाएं। पटोले ने कहा कि परमबीर सिंह ने तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की एमवीए सरकार को बदनाम किया।
कांग्रेस नेता पटोले ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (मैट) के आदेश में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिए थे कि परमबीर सिंह की विभागीय जांच की जाए। लेकिन शिंदे-फडणवीस सरकार ने ऐसा नहीं किया।
आगे उन्होंने कहा कि परमबीर को जब निलंबित किया गया था, तो उनके निलंबन को हर तीन महीने में जांच कर आगे बढ़ाना था, लेकिन राज्य सरकार ने परमबीर के खिलाफ विभागीय जांच ही नहीं की। इस वजह से उनके निलंबन को भी आगे नहीं बढ़ाया गया। यही कारण रहा कि मैट से परमबीर सिंह को राहत मिल गई और उनका निलंबन रद्द कर दिया।
परमबीर सिंह के खिलाफ जबरन वसूली से संबंधित चार प्राथमिकियां मुंबई और उससे सटे ठाणे में दर्ज की गई थीं। अधिकारी ने बताया कि राज्य के गृह विभाग ने बुधवार को उनका निलंबन वापस लेने का आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि आदेश के अनुसार सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी के निलंबन की अवधि को उसी तरह माना जाना चाहिए जैसे वह ड्यूटी पर थे। सिंह को दिसंबर 2021 में निलंबित कर दिया गया था जब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार सत्ता में थी।
महाराष्ट्र सरकार ने नवंबर 2021 में परमबीर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी। उनके खिलाफ रंगदारी के आरोपों में एफआईआर दर्ज थी। तब के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 12 नवंबर को अस्पताल से छुट्टी मिलते ही परमबीर के निलंबन आदेश पर दस्तखत किए थे। इसके साथ उस वक्त के ठाणे शहर के उपायुक्त पराग मनेरे को भी निलंबित कर दिया गया था।