अगर सबकुछ ठीक रहता तो जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल बनाए गए मनोज सिन्हा भाजपा केंद्रीय संगठन में महासचिव होते। करीब एक महीने पहले तैयार की गई नई केंद्रीय टीम की सूची में काफी विचार विमर्श के बाद सिन्हा को महासचिव बनाने पर सहमति बनी थी।
इसी बीच सूची जारी होने से पहले ही सिन्हा को केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का उपराज्यपाल बना दिया गया। सूत्रों के मुताबिक बीते लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले सिन्हा को महासचिव बनाने पर गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा दोनों की सहमति थी।
इसी सहमति के आधार पर नई टीम की तैयार की गई सूची में उन्हें बतौर महासचिव जगह दी गई थी। गौरतलब है कि एक महीने पूर्व तैयार की गई सूची को अब तक जारी नहीं किया गया है। इसे मोदी मंत्रिमंडल में इसी महीने संभावित विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
अचानक बदली परिस्थिति
जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक पहल के संदर्भ में सरकार में शीर्ष स्तर पर भले ही लगातार मंथन हो रहा था, मगर बाहर इसकी भनक भी नहीं थी। यहां तक कि निवर्तमान उपराज्यपाल जीसी मुर्मू को भी इसकी भनक नहीं थी कि उन्हें अचानक नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। यही कारण है कि बुधवार को अचानक इस्तीफा देने वाले मुर्मू का बृहस्पतिवार को कई लोगों से मिलने का कार्यक्रम तय था। बुधवार को शाम में इधर मुर्मू को इस्तीफा देने का निर्देश मिला तो इसी दौरान सिन्हा की पीएम से मुलाकात हुई।
जल्द सक्रिय राजनीति में लौटेंगे सिन्हा
पीएम की पसंद से सिन्हा को उपराज्यपाल बनाया जाना उनकी सक्रिय राजनीति का अंत नहीं है। सूत्रों का कहना कि सिन्हा को यह जिम्मेदारी बमुश्किल दो साल के लिए मिली है। इसके बाद वह फिर से सक्रिय राजनीति में लौटेंगे। चूंकि फिलहाल राज्य में राजनीतिक पहल की जरूरत थी। ऐसे में पीएम मोदी ने अपने विश्वस्त मनोज सिन्हा पर भरोसा जताया है।