तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार पर मुख्यमंत्री कार्यालय को शिफ्ट करने के लिए 6.17 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे का इस्तेमाल अस्थायी कार्यालय पर करने के बजाय लोगों के कल्याण में किया जाना चाहिए।
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष और पूर्व मंत्री नैनार नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार पर सरकारी पैसे के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए जनता के 6.17 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और यह फैसला व्यक्तिगत सुविधा के लिए लिया गया है।
विज्ञापन
नागेंद्रन ने सूचना के अधिकार के तहत सामने आए एक सरकारी दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा कि नमक्कल कविग्नर मालिगई की 10वीं मंजिल पर मुख्यमंत्री कार्यालय को शिफ्ट करने और इससे जुड़े कामों के लिए 6.17 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय को शिफ्ट करने पर क्यों उठे सवाल?
नागेंद्रन ने कहा कि जब फोर्ट सचिवालय में पहले से पर्याप्त सुविधाएं मौजूद हैं, तो अस्थायी तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय को शिफ्ट करने पर करोड़ों रुपये खर्च करने का क्या औचित्य है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक तरफ 1,200 करोड़ रुपये की लागत से नया सचिवालय बनाने की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ अस्थायी कार्यालय के लिए इतनी बड़ी रकम क्यों खर्च की जा रही है।
किसानों का मुद्दा उठाकर क्या बोले भाजपा नेता?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि तमिलनाडु में किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त भंडारण व्यवस्था नहीं होने की शिकायत कर रहे हैं। बारिश में धान खराब होने की स्थिति के बीच सरकार को इस तरह के खर्च पर विचार करना चाहिए। नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री से खर्च में कटौती करने और इस राशि को जनता के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बदलाव मुख्यमंत्री कार्यालय की दीवारों पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देना चाहिए।
RTI में क्या जानकारी सामने आई?
यह जानकारी 23 अगस्त को दाखिल RTI आवेदन के जवाब में सार्वजनिक भवन विभाग की ओर से दी गई। विभाग के जन सूचना अधिकारी और कार्यकारी अभियंता ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय को नमक्कल कविग्नर मालिगई की 10वीं मंजिल पर शिफ्ट करने और संबंधित कार्यों के लिए 6.17 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। नागेंद्रन ने इसी दस्तावेज के आधार पर सरकार के खर्च पर सवाल उठाते हुए इसे जनता के पैसे के इस्तेमाल का मुद्दा बताया है।