नागपुर में भड़की हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण हैं। पुलिस ने शहर में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। नागपुर पुलिस ने शहर में अशांति फैलाने के आरोप में 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। हंसपुरी इलाके में एक और झड़प के बाद कई घरों और वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। सीएम फडणवीस, नागपुर से सांसद नितिन गडकरी समेत तमाम लोगों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। आईए प्रत्येक्षदर्शियों से सुनते भयावह मंजर की कहानी....
महाराष्ट्र में इन दिनों औरंगजेब की मजार को लेकर सियासी घमासान अपने चरम पर है। अति तो तब हो गई जब सोमवार दोपहर नागपुर में फैली एक अफवाह से उठी चिंगारी शाम होते-होते हिंसक दंगों में बदल गई। इस हिंसा में लोगों का आक्रोश इतना तेज था कि नागपुर के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। साथ ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए झड़प में चार लोग घायल भी हो गए। चलिए अब इस हिंसा की भयावह रूप की कहानी को वहां उपस्थित लोगों की जुबानी समझते हैं..
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धारदार हथियार लेकर आए उपद्रवी
हंसपुरी के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि नकाबपोश समूह ने चेहरे स्कार्फ से छिपा रखे थे। उनके हाथों में धारदार हथियार, स्टिकर और बोतलें थीं। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया, दुकानों में तोड़फोड़ की और पथराव किया। उन्होंने 8-10 वाहनों में भी आग लगा दी।
नागपुर के पीड़ितों ने बयां की आंखों-देखी
उपद्रव और आगजनी को लेकर प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ितों में शामिल सुनील पेशने ने बताया कि उनकी कार हिंसा-आगजनी के दौरान आग के हवाले कर दी गई। घटना रात करीब 8.30 बजे हुई। 500-1000 लोगों की भीड़ ने पथराव किया। उपद्रवियों ने हमारी कार के अलावा करीब 25-30 वाहनों में तोड़फोड़ की। एक अन्य स्थानीय निवासी माधुरी पेशने ने कहा, उपद्रवी पत्थर लेकर इधर-उधर भाग रहे थे। उन्होंने हमारे घर पर पत्थर फेंके, यहां तक कि ऊपरी मंजिल पर रहने वाले बच्चों पर भी। उन्होंने हमारे दरवाजे और खिड़कियां तोड़ दीं।
कांग्रेस सांसद श्यामकुमार ने की हिंसा की निंदा
कांग्रेस सांसद श्यामकुमार बर्वे ने हिंसा की निंदा की। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा, नागपुर में हिंदू-मुस्लिम झड़प कभी नहीं हुई। दोनों समुदायों को शांति बनाए रखनी चाहिए। ऐसी घटनाओं के जरिए मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
कैसे शुरू हुई हिंसा, एक नजर
महल इलाके में औरंगजेब की कब्र को हटाने को लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति के पास बजरंग दल के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। पुलिस के मुताबिक अफवाह फैली कि आंदोलन के दौरान धार्मिक पुस्तक को जलाया गया है। बजरंग दल के प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिससे मुस्लिम समुदाय के सदस्यों में आक्रोश फैल गया। शाम को गणेशपेठ पुलिस स्टेशन में पवित्र पुस्तक को जलाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई।