पूर्वोत्तर के विभिन्न संगठनों ने अपनी अलग-अलग मांगों के समर्थन में असम को मणिपुर से जोड़ने वाले नेशनल हाइवे की बेमियादी नाकेबंदी का एलान किया है। इससे मणिपुर के साथ ही नगालैंड के लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। देश के बाकी हिस्सों से नगालैंड को भी यही सड़क जोड़ती है।
ताजा मामले में मणिपुर के दो संगठनों ने अलग-अलग मांगों के समर्थन में राष्ट्रीय राजमार्ग की नाकेबंदी का एलान किया है। मणिपुर विश्वविद्यालय ने केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देश पर आदिवासी छात्रों के लिए आरक्षण का कोटा 31 से घटा कर 7.5 फीसदी कर दिया है। इसके विरोध में नगा व कूकी छात्र संगठनों ने राज्य के पांच जिलों में बेमियादी नाकेबंदी शुरू कर दी है। वह आरक्षण का कोटा बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, नगालैंड में रोंगमेई नगा युवा मोर्चा नामक संगठन ने हाइवे की बदहाली के विरोध में इसकी बेमियादी नाकेबंदी का एलान किया है। उसकी इस अपील का हाइवे पर वाहन चलाने वाले ड्राइवरों ने भी समर्थन किया है। उन ट्रक चालकों ने अपने संसाधनों से इस सड़क की मरम्मत की भी बात कही है। इसके साथ ही नगालैंड में पेट्रोल व डीजल में बड़े पैमाने पर होने वाली मिलावट के विरोध में 21 संगठनों को लेकर गठित समन्वय समिति ने भी 17 अक्तूबर से आंदोलन का एलान किया है। समिति का आरोप है कि राज्य सरकार ने घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने से इंकार कर दिया है। ऐसे में उनके समक्ष आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं है। इस मिलावटी ईंधन का 80 फीसदी हिस्सा पड़ोसी मणिपुर में बेचा जाता है। उधर, विभिन्न संगठनों की नाकेबंदी की अपील को ध्यान में रखते हुए नगालैंड के पीडब्ल्यूडी मंत्री के. बीरेन ने इंजीनियरों के साथ राजधानी कोहिमा में आपात बैठक की, लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।