नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधनों पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कानून में प्रस्तावित बदलावों से चर्चों और ईसाई धर्मार्थ संगठनों पर बोझ बढ़ सकता है तथा राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। रियो ने प्रस्ताव दिया कि एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों को व्यापक जांच के लिए एक संसदीय समिति के पास भेजा जाए और संबंधित हितधारकों के प्रतिनिधियों को अपने विचार रखने का मौका दिया जाए।
पत्र में नगालैंड सीएम ने क्या लिखा?
उन्होंने कहा कि इससे चिंताओं का समाधान करने, आशंकाएं दूर करने और पारदर्शिता, जवाबदेही तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए जनता का विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी। सोमवार को शाह को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम एनडीए सरकार के समावेशी और सकारात्मक दृष्टिकोण को पेश करेगा तथा संवैधानिक मूल्यों, धर्मनिरपेक्ष भावना और सभी समुदायों के अधिकारों एवं योगदान के प्रति सम्मान के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराएगा।
इस साल जून में सरकार ने एफसीआरए नियम अधिसूचित किए थे
इस साल जून में सरकार ने विदेशी धन प्राप्त करने से संबंधित संशोधित एफसीआरए नियम अधिसूचित किए थे। इनके तहत गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को पहले से निर्धारित उद्देश्यों और कार्यक्षेत्रों की सूची में से चयन करना होगा। हालांकि संशोधित नियमों में विभिन्न धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी गई है, लेकिन एफसीआरए के तहत पंजीकरण के लिए पात्र कई श्रेणियों में धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने वाली गतिविधियों को साफ तौर पर बाहर रखा गया है।
एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 को इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था और संसद के मौजूदा मानसून सत्र में इस पर चर्चा होने की संभावना है। रियो ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से ईसाई समुदाय ने कानून में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि नागालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल और कोहिमा के बिशप ने भी केंद्रीय गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपकर चर्चों और उनसे जुड़े धर्मार्थ संगठनों के सामने आ रही कठिनाइयों को रखा है।
नगालैंड के विकास में चर्चों की अहम भूमिका
रियो ने अनुरोध किया कि नगालैंड की विशिष्ट सामाजिक, ऐतिहासिक और विकास संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन ज्ञापनों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए। नगालैंड की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी ईसाई है और इसका उल्लेख करते हुए रियो ने कहा कि चर्चों ने राज्य के आध्यात्मिक और सामुदायिक जीवन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक कल्याण, आजीविका सहायता तथा वंचित और कमजोर वर्गों की मदद में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से दूरदराज और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, मानवीय सहायता और सामाजिक सेवा से जुड़ी कई गतिविधियों को वैध विदेशी अंशदान, साझेदारी और सहायता से समर्थन मिला है।