गुवाहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा पीठ ने मंगलवार को नगालैंड के मुख्यमंत्री एस. लेजित्सु की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने सदन में शक्ति परीक्षण के राज्यपाल पीबी आचार्य के निर्देश पर रोक लगाने की मांग की थी।
इसके बाद अब नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के बागी गुट के साथ समझौता नहीं होने की हालत में शक्ति परीक्षण में लेजित्सु सरकार की हार तय मानी जा रही है। राज्यपाल के आदेश के मुताबिक कल सीएम लेजित्सु को विधानसभा में विश्वासमत हासिल करना है। सियासी गिलियारों में इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि फ्लोर टेस्ट से पहले मुख्यमंत्री एस. लेजित्सु इस्तीफा दे सकते हैं।
मालूम हो कि पूर्व मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग ने हाल में 60 सदस्यीय विधानसभा में 41 सदस्यों के समर्थन का दावा करते हुए राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया था। उसके बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री लेजित्सु को 15 जुलाई या उससे पहले सदन में विश्वासमत हासिल करने का निर्देश दिया था।
लेजित्सु ने राज्यपाल के इस निर्देश को अवैध, असंवैधानिक और एकतरफा करार देते हुए बीते शुक्रवार को हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में इस पर रोक लगाने की मांग की थी। उसी याचिका की सुनवाई के बाद अदालत ने उक्त फैसला सुनाया।
लेजित्सु की दलील दी थी कि विधायकों की बगावत एनपीएफ का अंदरूनी मामला है और इसे पार्टी की बैठक में सुलझाया जाना चाहिए, विधानसभा में नहीं। लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को नहीं माना। अब शक्ति परीक्षण का फैसला राज्यपाल पर निर्भर है। जेलियांग गुट के समर्थक विधायकों की तादाद ध्यान में रखते हुए ऐसी हालत में लेजित्सु सरकार का जाना लगभग तय है।