असम सरकार की जादू-टोने से उपचार पर रोक लगाने वाली योजना को लेकर नगालैंड ने ऐतराज जताया। प्रदेश में विधानसभा में उपमुख्यमंत्री टीआर जेलियांग ने इस मुद्दे पर बहस की। उन्होंने कहा कि क्रिश्चियन हीलिंग एक ऐसा तरीका है, जिसमें बीमारियों से जूझ रहे इंसान को कुछ हद तक आराम दिलाने की कोशिश रहती है। लेकिन इसको धार्मिकता से जोड़ने के बजाय जादू-टोने से लेबल करना ईसाई आस्था और जीवन के आध्यात्मिक आयामों का अपमान है।
उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पूर्वोत्तर भारत कई धर्म देखने को मिल जाएंगे, जो इस क्षेत्र में विविधता में एकता की समृद्धि को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि नगालैंड के वाणिज्यिक शहर दीमापुर में हिंदू दीपावली और दुर्गा पूजा बहुत धूमधाम से मनाते हैं जबकि मुस्लिम बकरीद भी उतनी ही जीवंतता के साथ मनाते हैं।
हिंदू धर्म अनुष्ठानों और अनुष्ठानों, समारोहों और पूजा के तरीकों को निर्धारित करता है, जिन्हें हिंदू धर्म का अभिन्न अंग माना जाता है। उन्होंने कहा, इसी तरह ईसाई धर्म भी विश्वासियों को हमारे भगवान और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के नाम पर प्रार्थना करने और बीमारों और बीमारों को ठीक करने का निर्देश देता है।
असम सरकार से विधेयक रद्द करने का किया आह्वान
जेलियांग ने असम सरकार से इस विधेयक को रद्द करने और खत्म करने का भी आह्वान किया। एलजेपी विधायक डॉ सुखातो ए सेमा ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि भारत में धर्मनिरपेक्षता का तात्पर्य न केवल विविध धार्मिक समुदायों के अस्तित्व से है, बल्कि धर्म को राज्य से अलग करना भी है। इसलिए, यदि राज्य विवादास्पद कानूनों के माध्यम से नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है, तो धर्मनिरपेक्षता का भाग्य दांव पर है।
विधायक ने आगे कहा कि नागालैंड में ईसाइयों की संख्या 87.93 प्रतिशत है, फिर भी राज्य ने कभी भी किसी भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव नहीं किया है या ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया है जो धार्मिक अल्पसंख्यकों को खतरे में डाल दे।