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Nagaland: पूर्वोत्तर से कुछ समय बाद हट सकता है अफस्पा कानून! गृहमंत्री अमित शाह ने दिया बड़ा बयान

Tue, 21 Feb 2023 02:06 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा

सार

अमित शाह ने कहा कि पूर्वी नगालैंड में विकास संबंधी कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के बाद सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगा शांति समझौते पर बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई पहल से पूर्वोत्तर में शांति आ सकती है। 
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अमित शाह - फोटो : Twitter@bjp4india
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विस्तार
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक जनसभा के दौरान कहा कि नगा शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस काम की शुरुआत की है, उसका फल जल्द मिलेगा। गृहमंत्री ने ये भी कहा कि वह उम्मीद कर रहे हैं कि पूरे पूर्वोत्तर भारत से जल्द अफस्पा कानून हटाया जा सकता है। बता दें कि उत्तर पूर्वी राज्यों में लंबे समय से अफस्पा कानून हटाने की मांग की जा रही है और यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। 

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मंगलवार को नगालैंड के तुएनसांग इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि पूर्वी नगालैंड में विकास संबंधी कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के बाद सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगा शांति समझौते पर बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई पहल से उत्तर पूर्व में शांति आ सकती है। उत्तर पूर्व में उग्रवाद के मुद्दे पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि भाजपा शासन में हिंसा की घटनाओं में 70 फीसदी की कमी आई है। 

गृहमंत्री ने कहा कि उत्तर पूर्वी राज्यों में सुरक्षा बलों की मौत के मामलों में 60 फीसदी की कमी आई है। वहीं आम नागरिकों की मौतों के मामलों में 83 प्रतिशत की गिरावट आई है। अमित शाह ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा नगालैंड के बड़े हिस्से से अफस्पा कानून हटा दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले तीन से चार सालों में पूरे उत्तर भारत से अफस्पा कानून को हटा लिया जाएगा। बता दें कि नगालैंड विधानसभा के चुनाव 27 फरवरी को होने हैं। वहीं चुनाव के नतीजे दो मार्च को घोषित किए जाएंगे।
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बता दें कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) एक फौजी कानून है। इस कानून के तहत सुरक्षा बलों और सेना को कई विशेष अधिकार मिलते हैं। इनमें बिना वारंट संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी करने और चेतावनी के बाद भी कानून तोड़ने पर आरोपी की मौत तक बल प्रयोग का अधिकार शामिल है। अशांत और उग्रवाद प्रभावित इलाकों में इस कानून को लागू किया जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों में बीते कई सालों से यह कानून लागू है। इसे हटाने की मांग पुरानी है। अब अमित शाह के ताजा बयान से पूर्वोत्तर के लोगों की यह मुराद जल्द पूरी हो सकती है। 

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