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18 भारतीय जवानों के हत्यारोपी सुमी के नगा संगठन ने रखे हथियार

Thu, 24 Dec 2020 03:13 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, कोहिमा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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हिंसक अलगाववादी गतिविधियों के कारण अशांत चल रहे नगालैंड में शांति की बयार बहने की उम्मीद बढ़ गई है। बुधवार को खूंखार उग्रवादी निकी सुमी के नेतृत्व वाले नगा उग्रवादी समूह एनएससीएन-के ने करीब पांच साल बाद दोबारा हथियार रखते हुए अपनी तरफ से संघर्ष विराम की घोषणा की। साथ ही कहा कि उनकी तरफ से शांति वार्ता शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से संपर्क किया गया है।

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बेहद खतरनाक माने जाने वाले सुमी पर 2015 में मणिपुर में भारतीय सेना के 18 जवानों की हत्या करने का आरोप है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया था।


एनएससीएन-के ने इससे पहले 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के साथ संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन 14 साल बाद 2015 में यह समझौता उस समय तोड़ दिया था, जब समूह के चेयरमैन एसएस खापलांग जिंदा थे।
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सुमी ने बुधवार को संघर्ष विराम की घोषणा करते हुए कहा, इन सब सालों में एनएससीएन-के नगा मुद्दे का एक सम्मानजनक और स्वीकार्य राजनीतिक हल हासिल करने के लिए प्रयास करता रहा हे। समूह इस लंबे समय से मौजूद मामले के जल्द समाधान के लिए नगा लोगों के बीच मौजूद जबरदस्त भावनाओं के प्रति भी जागरूक है।

सुमी ने आगे कहा कि एनएससीएन-के सभी हितधारकों की भागीदारी के साथ नगा मुद्दे का निर्णायक और टिकाऊ हल तलाशने के लिए हालिया समय में केंद्र सरकार की तरफ से किए गए ईमारनदार व वास्तविक प्रयासों से भी वाकिफ है।

उन्होंने कहा, इस कारण एनएससीएन-के ने इस अहम मोड़ पर शांति प्रक्रिया को मजबूत करने और इसका समर्थन करने का संकल्प लिया है। हमारे नेता इस सिलसिले में भारत सरकार के अधिकारियों के साथ संबंध स्थापित कर रहे हैं।

इसी कारण एनएससीएन ने उस संघर्ष विराम को तत्काल प्रभाव से पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है, जिसे 2015 में निरस्त कर दिया गया था। अलगाववादी समूह ने केंद्र सरकार की तरफ से अपने इस कदम की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद जताई।

उधर, गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा, यह भारतीय मूल के नेताओं और कैडरों का आखिरी समूह है, जो म्यामांर से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा, उनके जुड़ने से नगा शांति प्रक्रिया को बेहद बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि एनएससीएन-के समूह के अन्य हिस्से म्यांमार केंद्रित हैं और सरकार के लिए अनुपयोगी हैं।

नगा उग्रवादियों के एक अन्य प्रभावशाली एनएससीएन-आईएम के साथ 1997 में ही केंद्र सरकार का संघर्ष विराम समझौता हो चुका था। इसके बाद चली शांति वार्ता में एनएससीएन-आईएम ने 3 अगस्त, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में स्थायी हल के तौर पर एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करते हुए खुद को मुख्यधारा में शामिल कर लिया था। यह एग्रीमेंट 18 साल में शांति वार्ता के 80 से ज्यादा दौर चलने के बाद सामने आया था।

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