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मिजोरम में शरण: गुप्त नेटवर्क के जरिये भारत आ रहे म्यांमार के बागी पुलिसकर्मी

अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 26 Mar 2021 06:20 AM IST

सार

  • अब तक करीब एक हजार लोग म्यांमार से मिजोरम आ चुके हैं
  • सीमा के दोनों तरफ कार्यकर्ता और स्वयंसेवक दिन-रात काम कर रहे हैं, जिसे सीक्रेट नेटवर्क नाम दिया गया है।
  • तारंबदी रहित सीमा का फायदा उठाते हुए 12 मार्च तक करीब 116 लोगों ने म्यांमार से पूर्वी मिजोरम में प्रवेश किया।
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म्यांमार में सैन्य क्रूरता से बचकर सैकड़ों बागी पुलिसकर्मी गुपचुप तरीके से भारत का रुख कर रहे हैं। इनकी मदद के लिए सीमा के दोनों तरफ कार्यकर्ता और स्वयंसेवक दिन-रात काम कर रहे हैं, जिसे सीक्रेट नेटवर्क नाम दिया गया है। यह नेटवर्क कार, बाइक मुहैया कराने से लेकर घने जंगल और पहाड़ों से लोगों को तस्करी वाले रास्तों के जरिए लाने में जुटा है। सीमा पार हो जाने पर भारत में स्थानीय कार्यकर्ता इन लोगों को भोजन और आवास सुविधा दे रहे हैं।

कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया कि वे म्यांमार में सेना द्वारा पकड़े जाने के डर से चोरी-छिपे भारत आए हैं। अपने देश में हालात को देखते हुए कुछ लोगों ने कहा है कि वे दोबारा म्यांमार जाना ही नहीं चाहते। बताया जा रहा है कि ये लोग कई रातों तक बिना खाए-पीए और नींद लिए लगातार चलकर भारत पहुंच रहे हैं।



राज्यसभा सांसद के वनलालवेना के मुताबिक, फरवरी के बाद से अब तक करीब एक हजार लोग म्यांमार से मिजोरम आ चुके हैं। वहीं, राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि तारंबदी रहित सीमा का फायदा उठाते हुए 12 मार्च तक करीब 116 लोगों ने म्यांमार से पूर्वी मिजोरम में प्रवेश किया था। 15 मार्च को आए एक दर्जन लोगों में अधिकांश पुलिसकर्मी और अग्निशमन से जुड़े लोग थे।

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म्यांमार में सैन्य क्रूरता से बचकर सैकड़ों बागी पुलिसकर्मी गुपचुप तरीके से भारत का रुख कर रहे हैं। इनकी मदद के लिए सीमा के दोनों तरफ कार्यकर्ता और स्वयंसेवक दिन-रात काम कर रहे हैं, जिसे सीक्रेट नेटवर्क नाम दिया गया है। यह नेटवर्क कार, बाइक मुहैया कराने से लेकर घने जंगल और पहाड़ों से लोगों को तस्करी वाले रास्तों के जरिए लाने में जुटा है। सीमा पार हो जाने पर भारत में स्थानीय कार्यकर्ता इन लोगों को भोजन और आवास सुविधा दे रहे हैं।

कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया कि वे म्यांमार में सेना द्वारा पकड़े जाने के डर से चोरी-छिपे भारत आए हैं। अपने देश में हालात को देखते हुए कुछ लोगों ने कहा है कि वे दोबारा म्यांमार जाना ही नहीं चाहते। बताया जा रहा है कि ये लोग कई रातों तक बिना खाए-पीए और नींद लिए लगातार चलकर भारत पहुंच रहे हैं।

राज्यसभा सांसद के वनलालवेना के मुताबिक, फरवरी के बाद से अब तक करीब एक हजार लोग म्यांमार से मिजोरम आ चुके हैं। वहीं, राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि तारंबदी रहित सीमा का फायदा उठाते हुए 12 मार्च तक करीब 116 लोगों ने म्यांमार से पूर्वी मिजोरम में प्रवेश किया था। 15 मार्च को आए एक दर्जन लोगों में अधिकांश पुलिसकर्मी और अग्निशमन से जुड़े लोग थे।

जीवन-मरण का मामला, इसलिए दे रहे मदद

सीक्रेट नेटवर्क के कार्यकर्ता म्यामांर के लोगों को भारत पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया मैसेजिंग एप्लीकेशन, दोनों देशों के सिम कार्ड, जीप और तिअऊ नदी के किनारे तस्करी वाले रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। नेटवर्क से जुड़े एक 29 वर्षीय कार्यकर्ता का कहना है कि हम लोगों की सीमा पार लाने में मदद इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यह उनके जीवन-मरण का मामला है। यह कार्यकर्ता म्यांमार के कई लोगों को पूर्वी मिजोरम तक लाने में मदद कर चुका है।
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