वहीं आयोग मैंबर सेक्रेटरी यशवंत जैन ने बताया कि स्कूलों में बच्चों के साथ बढ़ रहीं यौन हिंसा को देखते हुए अब प्रधानाचार्यों और अध्यापकों को भी पॉस्को एक्ट और पॉस्को ई-बॉक्स के बारे में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि कई बार इस तरह की घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं हो पाती है, जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को बच्चों के लिए दोस्ताना रवैया अपनाना चाहिए। पॉक्सो के तहत होने वाली घटनाओं पर गंभीर रहना चाहिए। स्कूल के अंदर जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो यह काफी हैरान और परेशान करने वाला होता है।
एनसीईआरटी की किताबों में होगा शामिल
जैन ने पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि अगर किसी गुरुकुल, स्कूल, आश्रम में अपराध बच्चों के साथ होता है। इस बारे में कोई रिपोर्ट नहीं करता है, तो उसके खिलाफ भी मामला दर्ज होगा।
उन्होंने बताया कि नए सत्र से छात्र एनसीईआरटी की सोशल साइंस की किताब में पॉक्सो एक्ट के बारे में पढ़ सकेंगे। नये सत्र से इन किताबों के माध्यम से अच्छे और बुरे स्पर्श तथा चाइल्ड हेल्पलाइन के बारे में जानकारी मिलेगी। एनसीईआरटी की छठीं से बारहवीं तक की सभी किताबों के पहले पन्ने पर पॉक्सो ई-बॉक्स इंफॉर्मेशन दी गई है।
पॉक्सो ई-बॉक्स के बारे में बाल गृहों के बच्चों को बताएंगे
साथ ही यशवंत जैन का कहना है कि पिछले कुछ समय में देश के कुछ बाल गृहों में बच्चों के साथ यौन हिंसा की घटनाएं सामने आईं हैं, जिसके चलते इन बाल गृहों के बच्चों को पॉक्सो ई-बॉक्स की जानकारी होना आवश्यक है। बालगृहों में कुछ जगहों पर चित्रों के जरिए पॉक्सो की जानकारी दी जाए। उन्होंने बताया कि हम यह तय करेंगे कि कैसे बालगृहों के बच्चों को भी पॉस्को ई-बॉक्स की जानकारी हो, ताकि परेशानियों में घिरे बच्चे-बच्चियां सीधे आयोग से संपर्क कर सकें।
बच्चों के साथ यौन हिंसा में महाराष्ट्र अव्वल
गौरतलब है कि राष्ट्रीय अपराध अनुसंधान ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 में बच्चों के साथ यौन हिंसा के 3 हजार 350 मामले दर्ज किए गए। जिनमें अकेले महाराष्ट्र में 1,043, उत्तर प्रदेश में 729 और मध्य प्रदेश में 471 मामले दर्ज हुए।