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चुनौती: महाराष्ट्र में मिला वायरस का डेल्टा प्लस वैरिएंट, इम्युनिटी को दे सकता है धोखा

अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 21 Jun 2021 09:41 AM IST

सार

  • कोविड का पालन नहीं किया गया तो भारत में वायरस का यह रूप आक्रामक तरीके से फैल सकता है
  • बी1.617.2 का आक्रामक रूप इम्युनिटी को आसानी से धोखा दे सकता है
  • ब्रिटेन में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट तेजी के साथ बढ़ रहा है
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कोरोना का नया स्वरूप - फोटो : pixabay


के417एन नाम का म्यूटेशन देखा गया है, डॉक्टर गुलेरिया ने कहा- अगले कुछ हफ्ते अहम

डॉक्टर गुलेरिया ने बताया कि भारत में वायरस के417एन नाम के साथ एक और म्यूटेशन कर रहा है। ब्रिटेन में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट तेजी के साथ बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे अभी वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (वीओआई) की श्रेणी में रखा है। हालांकि वायरस का यह रूप समय के साथ आक्रामक हुआ तो इसे भी वैरिएंट ऑफ कन्सर्न की श्रेणी में रखना होगा।


दूसरी लहर की धीमी गति के बीच कोविड का पालन नहीं किया गया तो भारत में वायरस का यह रूप आक्रामक तरीके से फैल सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वायरस के बयान खतरे से बचने के लिए वायरस के स्पाइक पर नजर रखनी होगी। जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर देना होगा ताकि पता चले कि डेल्टा की क्या स्थिति है और इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है।


निगरानी 

  • जीनोम सीक्वेंसिंग से पता चलेगा वायरस के नए रूप का स्वभाव। 
  • टीके व मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को कैसे कर रहा है प्रभावित। 

मुश्किल 

  • ब्रिटेन से हमें सबक लेना होगा, सतर्क के नहीं हुए तो आने वाले तीन चार महीने में हम फिर से पुरानी स्थिति में जा सकते हैं।

डेल्टा प्लस के 7 मामले मिले


महाराष्ट्र डायरेक्टरेट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के निदेशक डॉक्टर टीपी लहाणे ने बताया कि नवी मुंबई, पालघर और रत्नागिरी में डेल्टा प्लस के कुल 7 मामले मिले हैं। सभी सैंपल की जांच की जा रही है जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके। इन क्षेत्रों से कुछ और सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं जिससे पता चलेगा कि वायरस का यह रूप चल रहा है या सीमित है।




डेल्टा प्लस वैरिएंट खतरनाक क्यों

वायरस का डेल्टा रूप बी1.617 वैरिएंट अत्यधिक संक्रामक था। इसका स्पाइक प्रोटीन वायरस को मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने में मदद करता है अब के417एन म्यूटेशन वाला वायरस पुराने वायरस की तुलना में मानव के रोग प्रतिरोधक तंत्र को आसानी से धोखा दे सकता है। इस वजह से कह सकते हैं कि यह वैक्सीन और किसी भी ड्रग थैरेपी के लिए भी चुनौती खड़ी कर सकता है।

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