सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बृहस्पतिवार को कहा कि विवादित ढांचे के बाहरी अहाते में निर्मोही अखाड़ा 1855 से पूजा करता था, लेकिन मालिकाना हक मुस्लिमों के पास था।
धवन ने कहा, अखाड़ा बाहरी अहाते में स्थित राम चबूतरे पर पूजा करता था। हमने राम चबूतरे पर पूजा और पूजा के अधिकार को कभी मना नहीं किया लेकिन उस स्थल का मालिकाना हक हमारे पास था।
अखाड़ा दावा करता है कि 1734 से उस जगह पर उसका मालिकाना हक है। हमारा कहना है कि वे 1855 में बाहरी आहते में थे। राम चबूतरा बाहरी अहाते में है और माना जाता रहा है कि वही राम जन्मस्थल है, लेकिन यहां विवाद जमीन के स्वामित्व का है।
इस पर जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने पूछा कि क्या मुस्लिम और निर्मोही अखाड़ा वहां साथ रह रहे थे? इसके जवाब में धवन ने कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि अखाड़े के पास मालिकाना हक है। मूर्ति को 22-23 दिसंबर, 1949 को विवादित ढांचे के गुंबद के नीचे रखा गया। इसके साक्ष्य हैं। उन्होंने जिलाधिकारी केके नायर और सिटी मजिस्ट्रेट गुरुदत्त सिंह के फोटोग्राफ पेश किए।