ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ संशोधन बिल (Waqf Bill) के मुद्दे पर बुधवार को पटना में बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। इसमें लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव सहित बिहार की राजनीति के कई बड़े राजनीतिक लोग भी पहुंचे। इसके पहले इसी तरह का विरोध प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित किया गया था। इसी साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों और इसमें मुसलमान मतदाताओं की प्रभावी भूमिका को देखते हुए आज का प्रदर्शन बहुत महत्त्वपूर्ण हो गया है।
बिहार में मुसलमानों की आबादी करीब 17.70 प्रतिशत है। बिहार में इन मतदाताओं की पहली पसंद राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस होती है। जिस तरह पूरे देश में मुसलमानों ने कांग्रेस के पक्ष में अपनी रुचि दिखाई है, बिहार में भी यह जारी रह सकता है। राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर गठबंधन को इसका बड़ा लाभ मिलना तय है। आज आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आज के प्रदर्शन को समर्थन देने जिस तरह लालू यादव पहुंचे हैं, यह उसी समीकरण को साधने की कोशिश हो सकती है। नीतीश कुमार की अपनी छवि के कारण मुसलमानों का एक वर्ग उन्हें यानी जदयू को भी वोट करता है। लोजपा और जीतन राम मांझी भी सीमित मात्रा में मुसलमान मतदाताओं को आकर्षित करते हैं।
वक्फ बोर्ड में बदलाव के मुद्दे पर देश के मुसलमानों के बीच में जिस तरह की हलचल देखी जा रही है, उससे बिहार चुनाव में मुसलमान राजद-कांग्रेस के पक्ष में एकजुट हो सकता है। इसका सीधा नुकसान जदयू को हो सकता है जो कई सीटों पर उसका चुनावी समीकरण बिगाड़ सकता है। कुछ दिन पहले जिस तरह मुसलमानों से जुड़े कुछ संगठनों ने नीतीश कुमार के इफ्तार पार्टी का विरोध किया था, इसका लाभ भी राजद-कांग्रेस को हो सकता है। आज का विरोध प्रदर्शन इस समीकरण को और अधिक प्रभावित करने की एक कोशिश हो सकती है। लोजपा (रामविलास पासवान गुट) और हम को भी इसका कुछ नुकसान हो सकता है। वक्फ के मुद्दे पर चिराग पासवान जैसे नेता जिस तरह 'हर स्थिति पर नजर बनाए रखने' जैसे सधे बयान दे रहे हैं, उससे यही इशारा मिलता है कि ताजा सियासी घटनाक्रम ने उन्हें भी चिंता में डाल दिया है।
मुसलमानों को उसका अधिकार मिले: कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता रितु चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि वक्फ का मामला पूरी तरह से मुसलमानों का आंतरिक मामला है। वक्फ संपत्तियों को गरीब मुसलमानों की भलाई के लिए दान किया गया है। किसी सरकार को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह किसी भी धर्म के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करे।
रितु चौधरी ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार लगातार देश में धार्मिक उन्माद बढ़ाकर जनता को विभाजित करना चाहती है। लेकिन दुनिया का इतिहास बताता है कि इस तरह का धार्मिक उन्माद किसी भी देश में आर्थिक-सामाजिक तरक्की लाने में सफल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे केवल विनाश होता है, लोगों के बीच दूरियां पैदा होती हैं और भाजपा को भी जनता को धार्मिक आधार पर विभाजित कर देश का नुकसान नहीं करना चाहिए।
'कांग्रेस-राजद नेताओं ने कब्जाई वक्फ की संपत्ति'
भाजपा नेता अब्दुल रहमान ने अमर उजाला से कहा कि वक्फ के मुद्दे पर आज पटना का प्रदर्शन पूरी तरह प्रायोजित है। यह आम मुसलमानों का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि कांग्रेस और राजद के कुछ नेताओं के इशारे पर खेला गया 'राजनीतिक ड्रामा' है। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि कांग्रेस और आरजेडी के कई बड़े-बड़े नेताओं ने पटना में ही वक्फ बोर्ड की करोड़ों की संपत्तियों को कब्जा कर रखा है। इन नेताओं को डर है कि यदि वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पास हो गया तो उन्हें ये करोड़ों की संपत्तियां छोड़नी पड़ सकती हैं, इसीलिए एक साजिश के तौर पर वक्फ बिल को रोकने की कोशिश की जा रही है।
अब्दुल रहमान ने कहा कि पटना में एक बड़े मॉल के पास वक्फ की कुछ संपत्तियां हैं। इनमें से कुछ संपत्तियां बेहद पॉश एरिया में हैं जिनकी आज की बाजार कीमत कई करोड़ रुपये में है। इनका मासिक किराया भी लाखों रूपये होना चाहिए। लेकिन वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर इन संपत्तियों को केवल 1500 रुपये वार्षिक की दर पर लीज पर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि, यदि इन संपत्तियों को बाजार मूल्य पर किराए पर भी दिया जाए तो इस आय से गरीब मुसलमानों का बड़ा भला किया जा सकता है। आम मुसलमान इस सच्चाई को समझ रहा है और यही कारण है कि तमाम प्रायोजित विरोध प्रदर्शन के बाद भी आम मुसलमान इन विरोध प्रदर्शनों से बहुत दूर है। रहमान ने कहा कि तीन तलाक की तरह केंद्र सरकार का यह कदम भी आम मुसलमानों के हित में है।
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