मस्क ने सेंसरशिप दिखाने का एलान किया तो केंद्र ने क्या कहा?
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एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने सरकारी स्तर से की जाने वाली कंटेंट कार्रवाई को यूजर्स के लिए अधिक स्पष्ट करने की तैयारी की है। मस्क ने कहा है कि सरकारों की ओर से मांगी जाने वाली किसी भी सेंसरशिप को अब साफ तौर पर देखा जा सकेगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि एक्स को भारत में लागू कानूनों का पालन करना ही होगा। ऐसे में मामला सिर्फ सोशल मीडिया की पारदर्शिता तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच अधिकारों और जिम्मेदारियों का सवाल भी सामने आया है।
केंद्र सरकार ने एक्स को क्या साफ संदेश दिया?
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि एक्स को ‘देश के कानून का पालन करना होगा’। सरकार का यह बयान मस्क की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें उन्होंने सरकारी अनुरोधों के बारे में यूजर्स को ज्यादा जानकारी देने की बात कही थी। यानी एक्स अपने प्लेटफॉर्म पर यह दिखाना चाहता है कि किसी सामग्री को हटाने या किसी अकाउंट पर रोक लगाने की मांग कहां से आई। वहीं भारत सरकार का कहना है कि प्लेटफॉर्म को देश में लागू नियमों के अनुसार ही काम करना होगा।
मस्क के प्रस्तावित बदलाव में यूजर्स को क्या-क्या दिखेगा?
प्रस्तावित बदलावों के तहत एक्स यूजर्स को यह जानकारी मिल सकती है कि किसी सरकार ने किसी पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है या नहीं। इसके साथ ही अनुरोध करने वाली सरकारी एजेंसी की जानकारी भी दिखाई जा सकती है। जहां उपलब्ध होगा, वहां यह भी बताया जाएगा कि कार्रवाई के लिए कौन-सा कानूनी आधार या कारण दिया गया था। इससे यूजर्स को यह समझने में आसानी होगी कि किसी कंटेंट पर कार्रवाई प्लेटफॉर्म के अपने फैसले से हुई या किसी सरकारी अनुरोध के बाद।
एक्स की पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश कितनी बड़ी है?
मस्क एक्स को खरीदने के बाद से लगातार यह कहते रहे हैं कि यूजर्स को यह पता होना चाहिए कि ऑनलाइन कंटेंट को किस तरह नियंत्रित और लोगों तक पहुंचाया जाता है। इसी दिशा में प्लेटफॉर्म अपने मॉडरेशन और कंटेंट वितरण की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रहा है। एक्स के रिकमेंडेशन सिस्टम को लेकर भी पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। प्लेटफॉर्म की कोशिश है कि यूजर्स और शोधकर्ता यह समझ सकें कि किसी पोस्ट की पहुंच क्यों बढ़ती है, क्यों घटती है या किसी सामग्री पर रीच प्रतिबंध क्यों लगाया जाता है।
सरकारों के कंटेंट हटाने के अनुरोध पर एक्स का रिकॉर्ड क्या कहता है?
मस्क के स्वामित्व के दौरान एक्स ने अलग-अलग अवधि में सरकारों की ओर से कंटेंट हटाने के 83 प्रतिशत से लेकर 98.8 प्रतिशत तक अनुरोधों का पालन किया है। यह अनुपालन दर अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधि के हिसाब से बदली है। उपलब्ध जानकारी में यह भी कहा गया है कि यह दर एक्स के पुराने प्रबंधन के समय की तुलना में ज्यादा रही है। इसलिए मस्क का नया कदम केवल पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे यह भी सामने आ सकता है कि सरकारों के अनुरोध पर प्लेटफॉर्म किस तरह कार्रवाई करता है।
मेटा को लेकर सरकार का ने क्या कहा था?
सरकार ने हाल ही में मेटा को भी स्पष्ट किया था कि भारत में मेटा के प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप काम करना होगा। आगे कहा था कि सराकर कंपनी के पूरे एल्गोरिदम को बदलना नहीं, बल्कि कंटेंट मॉडरेशन, CSAM, डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट से जुड़े मौजूदा सिस्टम को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना चाहती है। सरकार खास तौर पर स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों की बेहतर समझ, संवेदनशील मामलों में मानव समीक्षा तथा हटाए गए हानिकारक कंटेंट को दोबारा रिकमेंड होने से रोकने पर जोर देना चाहती है।
भारत में इस मुद्दे का महत्व क्यों बढ़ गया है?
भारत जैसे बड़े डिजिटल बाजार में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग राजनीतिक, सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। ऐसे में किसी पोस्ट को हटाने या उसकी पहुंच सीमित करने के फैसले का सीधा असर यूजर्स पर पड़ता है। अगर एक्स यह जानकारी सार्वजनिक करता है कि किस सरकारी एजेंसी ने कार्रवाई की मांग की और उसका आधार क्या था, तो यूजर्स को फैसले की पृष्ठभूमि समझने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, सरकार का रुख स्पष्ट है कि पारदर्शिता के नाम पर प्लेटफॉर्म देश के कानून से बाहर जाकर काम नहीं कर सकता।