...और इस बार चूक गया मुन्ना बजरंगी, हमेशा की तरह किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और उसकी मौत हो गई। जी हां, ऐसे कई मौके आए जब मुन्ना बजरंगी पुलिस को चकमा देकर भागने में कामयाब हो गया। 11 सितंबर 1998 को तो दिल्ली पुलिस और यूपी एसटीएफ ने दिल्ली के समयपुर बादली इलाके में उसे लगभग मार ही गिराया था। मुन्ना को 11 गोलियां लगी थीं। उसे मरा समझकर पुलिस उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गई, जहां उसकी सांस चल रही थी। बाद में उसकी जान बच गई, जबकि उसका साथी यतिंदर सिंह मारा गया था। इस एनकाउंटर के बाद उसकी मौत की खबर भी टीवी पर चला दी गई थी।
दिल्ली में एसीपी की हत्या में भी आया था नाम
2002 से 2009 के बीच मुन्ना बजरंगी ने ताबड़तोड़ कई लोगों की हत्या कर दहशत फैला दी। वह 150 से अधिक कांट्रेक्ट किलिंग में शामिल रहा। इस बीच 2009 में स्पेशल सेल के एसीपी राजबीर सिंह की गुरुग्राम में हत्या हो गई। पुलिस सूत्रों की मानें तो उस हत्याकांड की साजिश में भी उसका नाम आया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 29 अक्तूबर 2009 को मुंबई के मलाड से मुन्ना बजरंगी को धर दबोचा। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, एसीपी राजबीर जब तक जिंदा रहा तब तक मुन्ना बजरंगी ने दिल्ली में कदम नहीं रखा।
दिल्ली में दो मामले दर्ज
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की मानें तो मुन्ना बजरंगी के खिलाफ दिल्ली के समयपुर बादली इलाके में पुलिस पर जानलेवा हमला करने, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने और ड्यूटी के दौरान हमला करने का मामला दर्ज था। वहीं, 2009 में स्पेशल सेल के थाने में उसके खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने का भी मामला दर्ज किया गया था।