मुंबई में 31 जुलाई 2023 को चलती ट्रेन में हुए गोलीकांड पर एक गवाह ने शुक्रवार (17 अक्तूबर) को मुंबई की एक अदालत को बताया कि उसने आरोपी को बंदूक के बल पर एक यात्री को डिब्बे से बाहर ले जाते देखा था। इस घटना में अब बर्खास्त आरपीएफ कांस्टेबल ने चलती ट्रेन में कथित तौर पर चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
आरपीएफ कांस्टेबल चेतन सिंह ने अपने वरिष्ठ अधिकारी और तीन यात्रियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना मुंबई के पास जयपुर-मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट एक्सप्रेस में हुई थी, जहां आरोपी चेतन सिंह ड्यूटी पर तैनात था। उसने अपनी स्वचालित हथियार से अपराध किया और बाद में मीरा रोड और दहिसर के बीच उसे गिरफ्तार किया।
कोर्ट में गवाह की पेशी, बताई यात्री की पहचान
अब उसी ट्रेन में सवार यात्री बैंक मैनेजर, जो गवाह हैं वो मामले की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (दिंडोशी कोर्ट) एम एच पठान के समक्ष गवाह के रूप में पेश हुए। अभियोजन पक्ष की ओर से यात्री का विवरण पूछे जाने पर गवाह ने अदालत में कहा, "उसकी दाढ़ी थी, मूंछें नहीं थीं और उसका शारीरिक रूप देखकर कोई भी समझ सकता है कि वह मुस्लिम समुदाय से था।"
पूर्व रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कांस्टेबल चौधरी पर 31 जुलाई, 2023 की तड़के मुंबई से लगभग 100 किलोमीटर दूर पालघर स्टेशन के पास एक्सप्रेस ट्रेन में अपने वरिष्ठ सहयोगी, सहायक उप-निरीक्षक टीका राम मीणा और तीन यात्रियों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है।
न्यायिक हिरासत में जेल में है आरोपी जवान
तीनों मृतक यात्री, अब्दुल कादर मोहम्मद हुसैन भानपुरवाला, सैय्यद सैफुद्दीन और असगर अब्बास शेख, ट्रेन की अलग-अलग बोगियों में यात्रा कर रहे थे। चौधरी (41), जिन्हें इस जानलेवा गोलीबारी के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, उसे बाद में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने गिरफ्तार कर लिया। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में जेल में है।
अतिरिक्त लोक अभियोजक सुधीर सपकाले द्वारा पूछताछ किए जाने पर गवाह ने बताया कि वह ट्रेन के बी2 कोच में यात्रा कर रहा था। बैंक मैनेजर के अनुसार, सुबह लगभग 5 बजे उसने देखा कि एक आरपीएफ कांस्टेबल राइफल लेकर उसके कोच में आया और बीच वाली बर्थ पर सो रहे एक यात्री को जगा दिया। गवाह ने याद किया कि आरपीएफ कांस्टेबल ने राइफल तानकर यात्री को खड़े होने और डिब्बे से बाहर आने को कहा।
उसी कोच में सवार थे बैंक मैनेजर
गवाह ने अदालत को बताया, "फिर आरपीएफ कांस्टेबल ने बंदूक के बल पर उस व्यक्ति (यात्री) को मेरे कोच से बाहर निकाल लिया।" उसने गवाही में कहा, "घर पहुंचने पर मुझे पता चला कि आरपीएफ कांस्टेबल ने अपने वरिष्ठ अधिकारी और उस व्यक्ति सहित चार लोगों की हत्या कर दी थी, जिसे उसने बंदूक की नोक पर कोच से बाहर निकाला था।"
बचाव पक्ष के वकील जयवंत पाटिल के एक सवाल के जवाब में बैंक मैनेजर ने दावा किया कि उसे गोलीबारी की घटना के बारे में समाचार चैनलों और अपने कार्यालय के सहकर्मियों से पता चला, जो इस बारे में बात कर रहे थे। गवाह ने इससे पहले ठाणे जेल, जहां आरोपी बंद है वहां पहचान परेड के दौरान आरोपी की पहचान की थी।
अदालत में भी उसने बर्खास्त आरपीएफ कांस्टेबल की पहचान की, जिसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया था। आरोपी चौधरी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 153-ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के साथ-साथ रेलवे अधिनियम और महाराष्ट्र संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।