Rialway Route - सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : self
एक रिपोर्ट में चेताया गया है कि रेलवे रूट का निजीकरण जितना आसान दिखता है, उतना है नहीं। एक ओर प्रतिस्पर्धा पर कोई रोक नहीं है, तो वहीं लाभ से ज्यादा जोखिम हैं। यहां तक कि निजी ऑपरेटर किराया तय करने को स्वतंत्र हैं। मौजूदा समय में रेलवे यात्री ट्रेनों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए माल ढुलाई में लोगों से ज्यादा चार्ज वसूल रहा है।
इंडिया रेटिंग्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रूट निजीकरण में गैर प्रतिस्पर्धा वाले नियम न होने से नकदी प्रवाह का जोखिम बढ़ता है। वहीं ऑपरेटरों को 16 कोच की ट्रेन के लिए प्रति किलोमीटर ट्रैक रखरखाव, सिग्नलिंग, टर्मिनल और अन्य रखरखाव के लिए ढुलाई शुल्क भुगतान करने के लिए बाध्य किया जाता है। वहीं कार्गो संबधित जोखिम भी कहीं ज्यादा है। वहीं, अन्य क्षेत्रों में कुछ विशिष्ट नियम प्रतिस्पर्धा को रोकते हैं। ऐसे में रेलवे में इन नियमों के नहीं होने से राजस्व में अनिश्चितता को बढ़ाती है। हालांकि किराया तय करने की पूर्ण स्वायत्तता इस मॉडल को मजबूती देती है। टैक्सी एग्रीगेटर मॉडल की तरह ही डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल एक बेहतर विकल्प है।