मुंबई में जीएसटी सुधारों पर आयोजित संवाद सत्र में व्यापारियों ने ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नियामक संस्था गठित करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियां गैरकानूनी तरीके अपनाकर बाजार पर कब्जा कर रही हैं जिससे छोटे व्यापारी संकट में हैं।
जीएसटी सुधारों पर आयोजित एक संवाद सत्र में मुंबई के व्यापारियों ने ई-कॉमर्स कंपनियों पर सख्त नियंत्रण की मांग उठाई। रिटेल एंड डिस्पेंसिंग केमिस्ट्स एसोसिएशन और प्रॉमिनेंट ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि बड़ी विदेशी कंपनियां नियमों की अनदेखी कर बाजार पर कब्जा जमा रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इन कंपनियों पर नजर रखने और छोटे व्यापारियों की सुरक्षा के लिए सरकार को एक नियामक संस्था गठित करनी चाहिए।
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बैठक में केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी दरों में दी गई छूट और उसके व्यापार पर असर पर चर्चा हुई। व्यापारियों ने कहा कि यह कदम निश्चित रूप से कारोबार को राहत देगा। उन्होंने माना कि इन सुधारों से खुदरा व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं दोनों को फायदा होगा।
ई-कॉमर्स कंपनियों पर चिंता
व्यापारियों ने भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला को बताया कि विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां गैरकानूनी तरीकों से बाजार पर कब्जा करने में लगी हैं। उन्होंने कहा कि भारी पूंजी और आक्रामक रणनीतियों के कारण छोटे और स्थानीय कारोबारी हाशिये पर जा रहे हैं। इस पर उन्होंने सख्त नियमन की मांग दोहराई।
भाजपा का आश्वासन
भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने आश्वासन दिया कि सरकार छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का मकसद छोटे कारोबारियों को राहत देना और उपभोक्ताओं तक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि व्यापारियों की मांग सरकार तक पहुंचाई जाएगी।
संस्थाओं का योगदान
बैठक में यह भी बताया गया कि रिटेल एंड डिस्पेंसिंग केमिस्ट्स एसोसिएशन और प्रॉमिनेंट ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन लंबे समय से फार्मेसी समुदाय और छोटे व्यापारियों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय हैं। 1945 में स्थापित इन संस्थाओं का उद्देश्य व्यापार जगत की आवाज सरकार तक पहुंचाना और कठिनाइयों का हल निकालना है।
बैठक में शामिल प्रतिनिधि
इस संवाद सत्र में आचार्य पवन त्रिपाठी, जो मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष और श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं, भी मौजूद रहे। इसके अलावा बकुल भाई ठक्कर, रुकमाकर शेनॉय, तुषार कतरेचा, निलेश गालिया समेत कई व्यापारी और पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। सभी ने एक सुर में कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सख्त नियामक व्यवस्था समय की मांग है।