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टॉप जासूस ने संभाली मुंबई पुलिस की कमान, कई बड़े मामलों की जांच में थे शामिल

Sun, 01 Jul 2018 02:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुबोध कुमार जायसवाल (55) मुंबई के नए कमिश्नर नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने शनिवार को अपना पदभार ग्रहण किया। उन्होंने 9 साल बाद दिल्ली से मुंबई में वापसी की है। जायसवाल को जासूसों का मास्टर भी कहा जाता है। 1985 के आईपीएस अधिकारी रहे जायसवाल ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) में अपनी सेवाएं दी हैं।
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दत्ता पडसलगीकर ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक का कार्यभार संभाला

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अब तक मुंबई के पुलिस आयुक्त रहे दत्ता पडसलगीकर ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक का कार्यभार संभाला है। पडसलगीकर ने सतीश माथुर से पदभार ग्रहण किया। माथुर शनिवार को सेवानिवृत हो गए। जायसवाल 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह केंद्र की नियुक्ति पर थे। साथ ही कैबिनेट सचिवालय में अतिरिक्त सचिव भी रह चुके हैं।
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मालेगांव विस्फोट मामले की भी जांच जायसवाल ने ही की थी

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जायसवाल ने कई बड़े मामलों की जांच की है। मुंबई पुलिस में पहले भी अपनी सेवा दे चुके जायसवाल कई करोड़ रुपये के जाली स्टंप पेपर घोटाले की जांच करने वाले विशेष दल के प्रमुख थे। वह एटीएस में डीआईजी रह चुके हैं। साल 2006 में हुए मालेगांव विस्फोट को भला कौन भूल सकता है। इस मामले की भी जांच जायसवाल ने ही की थी।

सरकार को धन्यवाद दिया

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राज्य सरकार ने हाल ही में पत्र लिखकर जायसवाल से पूछा था कि क्या वह महाराष्ट्र वापस आना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र आने के लिए हां कर दी। नए पुलिस कमिश्नर का पद ग्रहण करने के बाद जायसवाल ने कहा कि वह गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सरकार को धन्यवाद दिया कि सरकार ने उन्हें ये जिम्मेदारी दी है और कई अफसरों में से उन्हें चुना है। जायसवाल ने कहा कि उन्होंने पूर्व में अपने काम के लिए कुछ मानक निर्धारित किए थे। उन्होंने कहा कि वह उन मानकों को बनाए रखेंगे।
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दो साल तक शहर में अपनी सेवाएं देंगे

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जब जायसवाल से पूछा गया कि मुंबई में उनकी क्या प्राथमिकताएं होंगी तो उन्होंने कहा कि मुंबई में काम करने की चुनौतियां वही रहेंगी, केवल परिस्थितियों में ही बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि जो भी चुनौतियां आएंगी उनकी टीम उन्हें स्वीकार करेगी। साल 1962 में जन्मे जायसवाल 2022 में रिटायर होंगे। यदि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के आधार पर पडसलगीकर दो साल तक डीजीपी के पद पर आसीन रहे तो जायसवाल दो साल तक शहर में अपनी सेवाएं देंगे।
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