मुगल शासक औरंगजेब की प्रशंसा वाले बयान को लेकर विवादों में घिरे समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अबू आजमी को मुंबई की सत्र अदालत से मंगलवार को राहत मिली। अदालत ने 20 हजार रुपये के मुचलके पर उन्हें अग्रिम जमानत दी है। उन्हें 12, 13 और 15 मार्च को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे के बीच जांच अधिकारी के सामने पेश होने को कहा गया है। साथ ही उन्हें सबूतो से छेड़छाड़ न करने को भी कहा गया है।
आजमी ने अग्रिम जमानत के लिए सत्र न्यायालय में याचिका दायर की थी। मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299, 302, 356 (1) और 356 (2) के तहत मामला दर्ज किया था।
अबू आजमी ने औरंगजेब को बताया था 'महान प्रशासक'
आजमी ने मुंबई में मीडिया से बात करते हुए कहा था, 'सारा गलत इतिहास दिखाया जा रहा है। औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए...औरंगजेब क्रूर नहीं था।' एक समाचार चैनल के साथ इंटरव्यू में सपा नेता ने कहा था, 'मैंने औरंगजेब के बारे में जितना पढ़ा है, उसने कभी भी जनता का पैसा अपने लिए नहीं लिया, उसका शासन बर्मा (वर्तमान म्यांमार) तक फैला हुआ था, उस समय देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि वह एक महान प्रशासक थे, उसकी सेना में कई हिंदू कमांडर थे।'
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कहां से शुरू हुआ था विवाद
यह ताजा विवाद मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े बेटे छत्रपति संभाजी महाराज पर केंद्रित एक बॉलीवुड फिल्म छावा से पैदा हुआ है। इस फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेरकर ने किया है। इसमें संभाजी के जीवन, राज्याभिषेक और मुगल साम्राज्य, खासकर औरंगजेब के खिलाफ संघर्ष को दिखाया गया है। विकी कौशल ने फिल्म में संभाजी की भूमिका निभाई है, जबकि रश्मि मंदाना ने उनकी पत्नी येसुबाई भोंसले की भूमिका निभाई है। फिल्म में अक्षय खन्ना ने औरंगजेब की भूमिका निभाई है।
मैंने हिंदू भाइयों के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा: आजमी
अपने बयान को लेकर विवादों में घिरने बाद आजमी ने कहा था, उस समय राजा सत्ता और संपत्ति के लिए संघर्ष करते थे, लेकिन यह संघर्ष धार्मिक नहीं था। उसने (औरंगजेब ने) 52 साल तक शासन किया और अगर वह वाकई हिंदुओं को मुसलमान बना रहा था तो कल्पना कीजिए कि कितने हिंदुओं ने धर्म परिवर्तन किया होगा। अगर औरंगजेब रहमतुल्लाह ने मंदिर तोड़े थे तो उसने मस्जिदें भी तोड़ी थीं। अगर वह हिंदुओं के खिलाफ होता तो 34 फीसदी हिंदू उसके साथ नहीं होते और उसके सलाहकार हिंदू नहीं होते। इसे हिंदू-मुस्लिम कोण (एंगल) देने की कोई जरूरत नहीं है। यह देश संविधान से चलेगा और मैंने हिंदू भाइयों के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा है।
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