मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर हाल ही में हुए गैस टैंकर हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार अब आपात स्थिति में क्षतिग्रस्त टैंकरों को एयरलिफ्ट करने के विकल्प पर विचार कर रही है। इस दुर्घटना के कारण करीब 36 घंटे तक भारी ट्रैफिक जाम लगा रहा, जिससे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
क्या है सरकार का नया एसओपी?
विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि सरकार ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने और आपात प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत हाईवे पर समर्पित हैजर्डस मटेरियल रिस्पॉन्स यूनिट्स स्थापित की जाएंगी और फायर-फाइटिंग सिस्टम को और सुदृढ़ किया जाएगा, खासकर टनल क्षेत्रों में फोम, पानी और अन्य अग्निशमन व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री ने दुर्घटना को लेकर क्या बताया?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि दुर्घटनाग्रस्त टैंकर के पास वैध लाइसेंस था और उसका नियमित निरीक्षण भी किया जा रहा था। 3 फरवरी को खंडाला घाट के पहाड़ी सेक्शन में चालक के नियंत्रण खोने से टैंकर पलट गया था, जिससे सैकड़ों वाहन फंस गए थे। हालांकि, अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई से गैस रिसाव या आग लगने जैसी बड़ी दुर्घटना टल गई।
आपात प्रोटोकॉल बनाने का निर्देश
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने पेट्रोलियम और अन्य ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन को लेकर तैयारियों पर सवाल उठाए, खासकर HPCL और BPCL जैसी कंपनियों द्वारा हाईवे पर खतरनाक पदार्थों के आवागमन के संदर्भ में। इस पर सरकार ने कंपनियों को पर्याप्त रेस्क्यू उपकरण रखने और स्पष्ट आपात प्रोटोकॉल बनाने के निर्देश दिए हैं।
किन मुद्दों पर चर्चा हुई और क्या सुझाव दिए गए?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कई देशों की तरह अत्यधिक आपात स्थिति में क्षतिग्रस्त टैंकरों को एयरलिफ्ट करने के विकल्प का अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई ट्रांसपोर्टरों के पास ऐसे हादसों से निपटने के स्पष्ट SOP नहीं हैं, जिन्हें अब अनिवार्य रूप से तैयार किया जाएगा।
एनसीपी (एसपी) विधायक जयंत पाटिल ने भी गंभीर जाम की स्थिति में हेलीकॉप्टर सेवा तैनात करने का सुझाव दिया, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हेलीकॉप्टर उपलब्ध हैं, लेकिन रात में उड़ान से जुड़े प्रतिबंध संचालन में बाधा बनते हैं।
सरकार ने हादसे के दौरान वसूले गए टोल को वापस करने की भी घोषणा की है। मैन्युअल टोल रिफंड तुरंत किया गया, जबकि 36 घंटे के दौरान फास्टैग से वसूले गए 5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी वाहन मालिकों को लौटाई जाएगी।
साथ ही, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को और उन्नत किया जाएगा, ताकि संकट की स्थिति में साइनबोर्ड और एसएमएस अलर्ट के जरिए रियल-टाइम जानकारी देकर वाहनों को प्रभावित मार्गों में प्रवेश से रोका जा सके। सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया है।