प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों की ट्रेन मेधा शनिवार को मुंबई में चली। आजादी के करीब 70 साल बाद भारत की पहली मेड इन इंडिया ट्रेन मेधा को रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने हरी झंडी दिखाई। स्वदेशी तकनीक से निर्मित मेधा ट्रेन ने पश्चिम रेलवे के दादर से बोरिवली और बोरिवली से चर्चगेट तक की यात्रा की। इस ट्रेन में खूबियों की भरमार है।
भारत की इस स्वदेशी ट्रेन में कई ऐसी खूबियां हैं जो उसे कई ट्रेनों से उसे अलग बनाती हैं। यह मेक इन इंडिया रैक स्वदेशी तकनीकी द्वारा निर्मित प्रथम रैक है। कोचों में बेहतर वायु संचारण की व्यवस्था है। इस गाड़ी में हाई पावर 3 फेज प्रोपुलशन सिस्टम है। इस रैक में मॉड्यूलर रूफ माउंटेंड फोर्सड वैंटिलेशन लगा है जो यात्रियों के क्षेत्र में प्रतिघंटा 16000 कूबिक मीटर वायु की आपूर्ति करेगा।
यात्रियों को बेहतर आरामदायक सेवा प्रदान करने हेतु कोच बनाए गए हैं। 12 कोचों सहित सिंगल रैक की कीमत 43.23 करोड रुपये है। एक हजार 168 सीटों वाली इस ट्रेन में एक साथ 6,050 यात्री यात्रा कर सकते हैं। यह ट्रेन 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। रिजेनरेटड ब्रेकिंग सिस्टम युक्त यह रेक परिचालन के दौरान 30 से 35 प्रतिशत बिजली बचत कर सकती है। पश्चिम रेलवे अधिकारी के मुताबिक मेधा को बनाने में लगभग 43.23 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं जबकि मौजूदा समय में उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर चलने वाली बॉम्बार्डियर ट्रेन की कीमत 44.36 करोड़ रुपये है।
इन लोकल ट्रेनों में इलेक्ट्रिक तकनीकी समेत अन्य तकनीकी संबंधी काम विदेशी कंपनी सीमेंस और बॉम्बार्डियर कंपनियां करती हैं। मेक इन इंडिया के तहत देश की पहली स्वदेशी लोकल मेधा हैदराबाद मेधा सर्वो ड्राइव्स फर्म की ओर से प्रायोजित है और चेन्नई कोच फैक्ट्री में इसे तैयार किया गया है। वर्तमान में मध्य और पश्चिम रेल पर परिचालित होने वाली लोकल चैन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में तैयार होती है।