फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परीक्षा में कम नंबर आए तो स्टूडेंट ने कोचिंग सेंटर पर ठोका केस, मिले 3 लाख रुपए

Fri, 27 May 2016 03:47 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
डेमो पिक
विज्ञापन
मुंबई में एक कोचिंग सेंटर पर उपभोक्‍ता अदालत ने 3.64 लाख रुपए का जुर्माना ठोक दिया है। कोर्ट ने माना कि कोचिंग सेंटर 2013 में 12वीं की स्‍टूडेंट को वादे के मुताबिक सेवाएं देने में नाकाम रहा। मिड-डे की खबर के मुताबिक, जज एमवाई मनकर और एसआर संदीप ने अंधेरी के लोखंडवाला कॉम्‍प्‍लेक्‍स स्‍थ‍ित कोचिंग सेंटर ऑक्‍सफोर्ड ट्यूटर्स को निर्देश दिया कि वह स्‍टूडेंट को न केवल फीस के 54 हजार रुपए लौटाए, बल्‍क‍ि लड़की और उसके परिवार के मानसिक उत्‍पीड़न के लिए 3 लाख रुपए का हर्जाना भी दें। अदालत ने कोचिंग सेंटर को कानूनी प्रक्रिया में खर्च के लिए भी दस हजार रुपए देने के लिए भी कहा है। ऑक्‍सफोर्ड ट्यूटर्स अकादमी एसएससी, एचएससी, सीबीएसई और आईसीएसई स्‍टूडेंट्स को घर पर कोचिंग की सेवा देता है। 
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, साइंस की स्‍टूडेंट अभिव्‍यक्‍त‍ि वर्मा एचएससी परीक्षाओं की तैयारियां कर रही थी। 2013 में उसने मैथ्स  और केमेस्‍ट्री के लिए कोचिंग ली थी। ऑक्‍सफोर्ड ट्यूटर्स अकादमी दावा करती है कि उसके पास अनुभवी शिक्षकों की फैकल्‍टी है। उसे अभिव्‍यक्‍त‍ि के घर ट्यूटर भेजने थे, लेकिन एक महीना बीतने के बाद भी वह  केमेस्‍ट्री का टीचर मुहैया कराने में नाकाम रही। इसके अलावा, मैथ्स को जो टीचर उन्होंने भेजा उसे अंग्रेजी नहीं आती थी। इस वजह से वह अभिव्‍यक्‍त‍ि को पढ़ा नहीं पा रहा था। 

अभिव्‍यक्‍त‍ि की मां नीना वकील हैं। उन्‍होंने कोचिंग सेंटर से कई बार केमेस्‍ट्री टीचर भेजने को कहा। कोचिंग सेंटर ने जिस टीचर को भेजा, वो आईसीएसई बोर्ड में आठवीं क्लास के स्‍टूडेंट्स को पढ़ाता था। नीना को डर सताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में पिछड़ जाएगी। उन्‍होंने एक बार फिर कोचिंग सेंटर से बीते साल नवंबर महीने में संपर्क किया। कोचिंग सेंटर ने एक आईआईटी स्‍टूडेंट को भेजा, जिसने थोड़ी मदद करने की कोशिश की, पर वह नाकाम रहा। 
विज्ञापन


इस कारण से एसएससी में 83 प्रतिशत नंबर पाने वाली अभिव्‍यक्‍त‍ि फिजिक्‍स, केमेस्‍ट्री और मैथ्‍स में मिलाकर 60 प्रतिशत अंक लाने में नाकाम रही। वह हैदराबाद के एक कॉलेज में दाखिला लेना चाहती थी, जहां मेरिट के आधार पर एडमिशन मिलता है। हालांकि, बाद में मैनेजमेंट से बातचीत के बाद उन्‍हें कॉलेज में एक सीट मिल गई। 

अभिव्‍यक्‍त‍ि ने बताया कि वह कोचिंग सेंटर की ओर से की गई देरी की वजह से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी। कोचिंग सेंटर की लापरवाही से खफा मां नीना ने 2015 में ऑक्‍सफोर्ड ट्यूटर्स अकादमी के खिलाफ केस दायर कर दिया। कोचिंग सेंटर ने कोर्ट के नोटिस का जवाब नहीं दिया। इसके बाद जज ने यह कहते हुए फैसला स्टूडेंट के हक में दे दिया कि कोचिंग सेंटर ने वादा पूरा नहीं किया।  
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें