मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारी रोजाना आठ से दस घंटे पूछताछ कर रहे हैं ताकि इस हमले के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाया जा सके। राणा को पिछले सप्ताह अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लगाया गया था।
आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि एनआईए के अधिकारी राणा की मेडिकल जांच सुनिश्चित कर रहे हैं और उसे उसके वकील से मिलने की भी इजाजत दी जा रही है। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार सुबह उसे अमेरिका से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद जांच एजेंसी को 18 दिनों की हिरासत में सौंप दिया था।
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हर दिन एनआईए 8-10 घंटे कर रही है पूछताछ
सूत्रों ने बताया कि एनआईए जांचकर्ताओं द्वारा राणा से प्रतिदिन लगभग आठ से दस घंटे तक पूछताछ की जा रही है, ताकि 2008 में लश्कर-ए-तैयबा द्वारा किए गए कायराना हमलों के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाया जा सके। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे और 238 से अधिक लोग घायल हुए थे।
एक सूत्र ने बताया, पूछताछ के दौरान राणा सहयोग कर रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्य जांच अधिकारी जया रॉय के नेतृत्व में एनआईए अधिकारियों की एक टीम उससे लगातार पूछताछ कर रही है। सूत्रों ने बताया कि राणा ने अब तक केवल तीन चीजें मांगी हैं - एक कलम, कागज की शीट या नोटपैड और कुरान। जो एनआईए की ओर से उसे मुहैया करा दी गई हैं।
निगरानी में 24 घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात
सूत्रों ने बताया कि राणा ने अब तक भोजन से संबंधित कोई विशेष मांग नहीं की है और उसे बनाए गए मानक प्रोटोकॉल के अनुसार वही खाना दिया जा रहा है, जो किसी अन्य आरोपी को दिया जाता है। सूत्रों ने कहा कि खूंखार आतंकी हमले की साजिश रचने वाले राणा को सीजीओ कॉम्प्लेक्स में एजेंसी के मुख्यालय के अंदर एक उच्च-सुरक्षा सेल में रखा गया है और चौबीसों घंटे सुरक्षाकर्मी उसकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर हो रही पूछताछ
सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान मूल के कनाडाई नागरिक से एजेंसी मुंबई हमले की जांच के दौरान जुटाए गए विभिन्न सुरागों के आधार पर पूछताछ कर रही है। इसमें राणा और उसके सह साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी के बीच फोन कॉल और ईमेल भी शामिल हैं। अमेरिकी नागरिक हेडली अभी अमेरिका की जेल में बंद है। राणा पर देश में साजिश, हत्या, आतंकवादी कृत्य और जालसाजी सहित कई अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।
राणा को सता रहा कसाब की तरह फांसी का खौफ
सूत्रों के अनुसार, राणा को भारत प्रत्यर्पण के बाद आतंकी अजमल कसाब जैसी फांसी का खौफ सता रहा है। इसलिए वह भारतीय कानून के बारे में हर जानकारी जुटा रहा है। वह बार-बार अधिकारियों से न्याय प्रक्रिया के बारे में सवाल कर रहा है। पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश पर नियुक्त किए गए दो सरकारी वकीलों ने राणा से आधे घंटे तक मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उस पर लगाए गए आरोपों की जानकारी दी। सूत्रों का कहना है कि राणा अपने खिलाफ लगी एक-एक धारा के बारे में सवाल कर रहा है। वह आगे की कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल के बारे में भी पूछ रहा है।
देश की सीमाओं से बाहर तक फैली साजिश...
पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष एनआईए जस्टिस चंदरजीत सिंह ने राणा को एनआईए की हिरासत में देते हुए कहा था कि 26/11 आतंकी हमले मामले में पेश की सामग्री दिखाती है कि साजिश भारत की सीमाओं से बाहर तक फैली हुई है। यह व्यापक साजिश है। इसमें मुंबई की तरह ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के कई शहरों को निशाना बनाया जाना था। आरोपी और उसके सहयोगियों की ओर से की गई रेकी से जुड़े सबूतों से उसका आमना-सामना कराना जरूरी है।